जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा और संसद में टकराव: सरकार राहुल गांधी को उद्धरण क्यों नहीं देने दे रही

Date:

Share post:

जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ आज सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के टकराव का प्रतीक बन चुकी है। यह वही किताब है, जिसका प्रकाशन 2023-24 में प्रस्तावित था, लेकिन अब तक रोक दिया गया है। पेंग्विन रेंडम हाउस द्वारा प्रकाशित होने वाली इस पुस्तक के कुछ अंश दिसंबर 2023 में समाचार एजेंसी पीटीआई ने जारी किए थे, जिनके आधार पर बाद में देश की कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं ने रिपोर्टिंग की। इन्हीं अंशों का हवाला दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में द कारवां मैगज़ीन ने भी दिया, और अंततः फरवरी 2026 में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इन्हीं तथ्यों को सदन में पढ़ने की कोशिश की। यहीं से विवाद खुलकर सामने आया।

संसद में जब राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब में लिखी बातों का जिक्र करना शुरू किया, तो सत्ता पक्ष ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई। स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि किसी अप्रकाशित किताब के आधार पर सदन में चर्चा करना संसदीय नियमों के खिलाफ है। इसके बाद सदन में भारी शोरगुल हुआ और राहुल गांधी को अपनी बात पूरी करने की अनुमति नहीं दी गई। सवाल यही है कि आखिर सरकार और सत्ता पक्ष को इस किताब के तथ्यों से इतनी असहजता क्यों है, जबकि ये बातें पहले ही पीटीआई और बाद में एक पत्रिका में सार्वजनिक हो चुकी हैं।

इस किताब में जिन मुद्दों को उठाया गया है, वे सीधे-सीधे सरकार की नीतियों, निर्णय प्रक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं। वर्ष 2020 के गलवान घाटी संघर्ष को लेकर जनरल नरवणे ने लिखा है कि जब चीनी टैंक भारतीय क्षेत्र में सामने आकर खड़े हो गए थे, तब सैन्य स्तर पर स्थिति बेहद गंभीर थी। भारतीय तोपें तैयार थीं, लेकिन फायर ओपन करने की स्पष्ट अनुमति राजनीतिक नेतृत्व के शीर्ष स्तर से नहीं मिली। यह दावा सरकार के उस आधिकारिक नैरेटिव से टकराता है, जिसमें कहा गया था कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में थी और किसी भी स्तर पर भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ नहीं हुई।

किताब में डेपसांग और पेंगोंग झील जैसे संवेदनशील इलाकों का भी जिक्र है, जहां वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर तनाव चरम पर था। नरवणे लिखते हैं कि एक समय भारत और चीन युद्ध के कगार पर पहुंच गए थे। उन्होंने खुद रात में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया था। रक्षा मंत्री ने यह कहकर निर्णय सेना पर छोड़ दिया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से बात कर ली है और यह पूरी तरह सैन्य फैसला है। नरवणे के शब्दों में, उस वक्त उनके दिमाग में सौ तरह के विचार एक साथ दौड़ रहे थे। अंततः हॉटलाइन पर बातचीत के जरिए चीन ने पीछे हटना शुरू किया, लेकिन किताब यह स्पष्ट करती है कि हालात कितने नाजुक थे।

गलवान घाटी संघर्ष को लेकर चीन के दावों पर भी नरवणे ने सवाल उठाए हैं। चीन ने जहां केवल चार सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी, वहीं नरवणे लिखते हैं कि चीनी सेना ने गलवान नदी से कई शव निकाले। भारतीय सैनिकों को बंदी बनाकर पीटा गया और 15-16 जून 2020 की रात हिंसा अपने चरम पर थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 16 जून चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का जन्मदिन था और उस दिन पीएलए को बीते 20 वर्षों में सबसे बड़ा घातक नुकसान उठाना पड़ा, जिसे वह कभी नहीं भूलेंगे। ये बातें सीधे तौर पर सरकार के उस सार्वजनिक रुख को चुनौती देती हैं, जिसमें चीन के साथ टकराव को सीमित और नियंत्रित बताया गया।

अग्निपथ योजना को लेकर किताब में किया गया खुलासा भी उतना ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। नरवणे के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ जैसी सीमित अवधि की भर्ती योजना का सुझाव दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे पूरी तरह बदलकर अग्निवीर आधारित योजना लागू कर दी। उन्होंने लिखा कि यह उनके लिए आकाश से बिजली गिरने जैसा था। नौसेना और वायुसेना के लिए भी यह फैसला अचानक और हैरान करने वाला था। यह बयान सरकार के उस दावे पर सवाल उठाता है कि अग्निपथ योजना पूरी तरह सशस्त्र बलों के सुझावों और सहमति से बनाई गई थी।

इन सभी बिंदुओं को अगर एक साथ देखा जाए, तो साफ समझ आता है कि सरकार इस किताब को लेकर क्यों सतर्क है। रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय ने इसके प्री-पब्लिकेशन रिव्यू की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं दी गई है। अक्टूबर 2025 में खुद जनरल नरवणे ने कहा था कि उनका काम किताब लिखना था, अब गेंद प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय के पाले में है। यानी लेखक ने अपनी भूमिका पूरी कर दी, लेकिन संस्थागत स्तर पर अभी भी हरी झंडी नहीं मिली।

यहीं से राजनीतिक बहस का असली सवाल उठता है। अगर किताब के अंश पहले ही पीटीआई जैसी आधिकारिक समाचार एजेंसी द्वारा प्रकाशित हो चुके हैं, और वे देश के प्रमुख अखबारों में छप चुके हैं, तो फिर संसद में उनका उल्लेख क्यों रोका जा रहा है। राहुल गांधी का तर्क यही रहा कि वे किसी गोपनीय दस्तावेज का नहीं, बल्कि सार्वजनिक डोमेन में मौजूद तथ्यों का हवाला दे रहे थे। सत्ता पक्ष का तर्क यह है कि चूंकि किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है और उस पर रक्षा मंत्रालय की क्लियरेंस नहीं है, इसलिए उसका उपयोग संसद में नहीं किया जा सकता।

सरकार इस पूरे मुद्दे को नियमों और प्रक्रियाओं के दायरे में रखकर देखना चाहती है। सेना से जुड़े अधिकारियों पर आर्मी एक्ट 1950 और आर्मी एक्ट 1954 के सेक्शन 21 के तहत बेहद सख्त नियम लागू होते हैं। सेवारत अधिकारी बिना केंद्र सरकार की अनुमति के सैन्य अभियानों, राजनीतिक मामलों या सेवा से जुड़ी सूचनाओं पर किताब, लेख या यहां तक कि व्याख्यान भी नहीं दे सकते। हालांकि नरवणे सेवानिवृत्त हो चुके हैं, फिर भी उनकी किताब का प्री-पब्लिकेशन रिव्यू इसी वजह से अनिवार्य माना गया।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार नियमों की आड़ में असहज सच्चाइयों को दबाना चाहती है। राहुल गांधी और कांग्रेस का कहना है कि अगर एक पूर्व थलसेना प्रमुख अपने अनुभव और आकलन लिख रहा है, तो उस पर खुली बहस होनी चाहिए, न कि उसे दबाया जाना चाहिए। संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और वहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाना असंवैधानिक नहीं, बल्कि आवश्यक है।

इस तरह जनरल नरवणे की आत्मकथा सिर्फ एक सैन्य संस्मरण नहीं रही, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच उस संघर्ष का केंद्र बन गई है, जहां एक ओर सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और नियमों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक बहस की मांग कर रहा है। राहुल गांधी को संसद में इस किताब के तथ्यों का हवाला देने से रोकना इसी बड़े राजनीतिक और वैचारिक टकराव का हिस्सा बन चुका है, जो आने वाले समय में और गहराने की संभावना रखता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Related articles

स्पेशल ओलंपिक केवल खेल नहीं, आत्मविश्वास और नेतृत्व का आंदोलन है : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्पेशल ओलंपिक में शामिल होने वाले खिलाड़ी चुनौतियों...

पेपरलेस रजिस्ट्री की सफलता के बाद, हरियाणा मार्च के आखिर तक फरीदाबाद से फेसलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पायलट प्रोजेक्ट करेगा शुरू

प्रदेश में पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को सफलतापूर्वक लागू करने के बाद हरियाणा सरकार अब भूमि प्रशासन व्यवस्था में...

Haryana Cabinet Approves Revision of Urban Development Fees, Signalling Policy and Planning Overhaul

Chandigarh/Haryana: In a significant policy move, the Haryana cabinet on Tuesday approved a comprehensive revision of urban development...

यमुनानगर नागरिक अस्पताल के एडमिन ब्लॉक में देर रात भीषण धमाका, सोलर गीजर ब्लास्ट की आशंका से हड़कंप

यमुनानगर के नागरिक अस्पताल में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रात करीब एक बजे...