नई दिल्ली/शिमला: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना के तहत हिमाचल प्रदेश को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। संसद में जानकारी देते हुए Jayant Chaudhary ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के कुल 199 विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता से आधुनिक शैक्षणिक ढांचे का विकास किया जा रहा है।
राज्यसभा में Indu Bala Goswami द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी साझा की गई। मंत्री ने कहा कि इन चयनित स्कूलों को देश में नई शिक्षा व्यवस्था के मॉडल संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां डिजिटल और समग्र शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इन स्कूलों में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनमें कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम, सुसज्जित पुस्तकालय, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और आधुनिक खेल अधोसंरचना शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान से लैस करना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में इन स्कूलों का व्यापक विस्तार किया गया है। बिलासपुर में 9, चंबा में 16, हमीरपुर में 17, कांगड़ा में 30, किन्नौर में 3, कुल्लू में 15, लाहौल-स्पीति में 2, मंडी में 30, शिमला में 24, सिरमौर में 15, सोलन में 21 और ऊना में 17 पीएम श्री स्कूल कार्यरत हैं। यह वितरण दर्शाता है कि राज्य के लगभग सभी भौगोलिक क्षेत्रों को इस योजना के तहत कवर किया गया है, जिससे दूरदराज के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
केंद्र सरकार का उद्देश्य इन स्कूलों के माध्यम से National Education Policy 2020 को प्रभावी ढंग से लागू करना है। इस नीति के तहत शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, तकनीक-आधारित और कौशल-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। पीएम श्री स्कूल इस दिशा में प्रयोगात्मक और मॉडल संस्थान के रूप में काम करेंगे, जहां नई शिक्षण पद्धतियों और नवाचारों को लागू किया जाएगा।
मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना के तहत कुल 14,500 स्कूलों का चयन किया जाना प्रस्तावित है। अब तक देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 13,091 स्कूलों का चयन किया जा चुका है, जो इस योजना के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में इस तरह की पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां भौगोलिक चुनौतियों के कारण शिक्षा तक पहुंच कई बार सीमित हो जाती है। डिजिटल सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से इन बाधाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
राज्य में पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाना जाता है, और पीएम श्री योजना के माध्यम से यहां के सरकारी स्कूलों को राष्ट्रीय स्तर के मॉडल संस्थानों में परिवर्तित करने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया गया है। इससे न केवल छात्रों की सीखने की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों को भी आधुनिक शिक्षण उपकरणों और संसाधनों का लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस योजना का दीर्घकालिक प्रभाव राज्य की मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करने में दिखाई देगा, जिससे रोजगार, नवाचार और सामाजिक विकास को नई गति मिल सकती है।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में पीएम श्री स्कूलों का विस्तार शिक्षा क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में राज्य को शैक्षणिक उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

