मनीष सिसोदिया की ‘साम, दाम, दंड, भेद’ वाली टिप्पणी पर बवाल, विपक्ष ने चुनाव आयोग से कड़ी कार्रवाई की मांग की

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आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं। पंजाब में आयोजित एक कार्यक्रम में सिसोदिया द्वारा कथित तौर पर 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर दिए गए बयान ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सिसोदिया की टिप्पणी लोकतंत्र की मूल भावना को ठेस पहुंचाती है और चुनाव जीतने के लिए ‘अलोकतांत्रिक और गैरकानूनी’ तरीकों को बढ़ावा देती है।

13 अगस्त को पंजाब में आप की महिला इकाई के नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सिसोदिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहते नजर आ रहे हैं, “2027 के चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद, सच, झूठ, सवाल, जवाब, लड़ाई, झगड़ा, जो करना पड़ेगा, करेंगे। तैयार हैं?” इस कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। यही बयान अब विपक्षी दलों के निशाने पर आ गया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सिसोदिया की इस टिप्पणी को ‘लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ’ बताते हुए निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है। जाखड़ का कहना है कि यह भाषण चुनावों को किसी भी कीमत पर जीतने की खुलेआम घोषणा है, जो न केवल जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन है बल्कि भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत भी गंभीर अपराध है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि धारा 123(1) रिश्वतखोरी, धारा 123(2) अनुचित प्रभाव और धारा 123(3ए) दुश्मनी बढ़ाने से संबंधित है। जाखड़ ने मांग की कि आयोग तत्काल इस मामले में जांच शुरू करे और सिसोदिया सहित आप की पंजाब इकाई के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करे।

भाजपा नेता ने आगे कहा कि यह टिप्पणी पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य में शांति, विकास और सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप नेता मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए प्रलोभन, धमकी और यहां तक कि हिंसा का रास्ता अपनाने की वकालत कर रहे हैं। जाखड़ के अनुसार, यह न केवल संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 में निहित नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की पूरी प्रक्रिया को कमजोर करता है।

इस विवाद में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) भी कूद पड़ा है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने निर्वाचन आयोग से सिसोदिया के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। बादल का कहना है कि यह टिप्पणी कार्यकर्ताओं को झूठ बोलने, झूठे वादे करने, मतदाताओं को लालच देने और यहां तक कि हिंसा का सहारा लेने के लिए उकसाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान भी उस समय मौजूद थे जब यह बयान दिया गया, लेकिन उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई, जिससे साफ है कि आप नेतृत्व इस सोच को समर्थन देता है।

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी सिसोदिया पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कोई चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि लोकतंत्र को नष्ट करने की स्वीकारोक्ति है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “जब कोई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंच से यह कहता है कि चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद, सच, झूठ और यहां तक कि हिंसा का इस्तेमाल किया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए सीधा खतरा है।”

इस पूरे विवाद ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक ओर आप कार्यकर्ताओं ने सिसोदिया के बयान को चुनावी जोश से जोड़ा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बता रहा है। अब निगाहें निर्वाचन आयोग पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या रुख अपनाता है। अगर आयोग विपक्ष की शिकायतों पर कार्रवाई करता है तो सिसोदिया और आप की पंजाब इकाई के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है।

सिसोदिया, जो लंबे समय तक दिल्ली सरकार में शिक्षा और वित्त जैसे अहम मंत्रालयों को संभाल चुके हैं, जेल से बाहर आने के बाद पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी यह टिप्पणी न केवल उनके राजनीतिक करियर बल्कि आप की साख पर भी असर डाल सकती है। पंजाब में पहले से ही आप सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है, ऐसे में यह विवाद उसकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

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