राहुल गांधी ने कर्नाटक में बड़े पैमाने पर वोटर फ्रॉड का लगाया आरोप, चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप; देशभर में मचा सियासी तूफान

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लोकसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बड़े स्तर पर वोटर फ्रॉड के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र को निशाने पर लिया है, जो बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट का हिस्सा है। एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी की आंतरिक जांच में महादेवपुरा में वोटिंग डेटा में भारी हेराफेरी सामने आई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, जो लोकतंत्र का रक्षक होना चाहिए, भाजपा की मिलीभगत से चुनाव “चुराने” का जरिया बन गया है।

राहुल गांधी के अनुसार, कांग्रेस को आंतरिक मूल्यांकन में कर्नाटक में 16 सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी केवल 9 पर सिमट गई। पार्टी ने जिन सात अप्रत्याशित हारों की जांच की, उनमें महादेवपुरा को केंद्र में रखा गया। यहां कांग्रेस को 1,15,586 वोट मिले जबकि भाजपा को 2,29,632 वोट मिले—यानी यह वही सीट थी जिसने बेंगलुरु सेंट्रल में भाजपा की 32,707 वोटों से जीत सुनिश्चित की। राहुल गांधी का आरोप है कि यहां 1,00,250 वोटों की “चोरी” की गई, वो भी पांच अलग-अलग तरीकों से—डुप्लीकेट वोटर, फर्जी या अमान्य पते, एक ही नाम कई राज्यों में, एक ही पते पर दर्जनों वोटर, और पहचान पत्रों में धुंधली या सूक्ष्म फोटो।

उन्होंने यह भी कहा कि कई वोटरों के पते जांच में मौजूद नहीं पाए गए, और जहां दर्जनों लोग दर्ज थे, वहां वास्तव में केवल एक ही परिवार रहता है। साथ ही, फॉर्म-6, जो पहली बार वोट करने वालों के लिए होता है, का गलत इस्तेमाल कर फर्जी नाम जोड़े गए। राहुल गांधी ने यह भी बताया कि जब कांग्रेस ने डिजिटल वोटर रोल की मांग की, तो चुनाव आयोग ने देने से इनकार कर दिया, जिससे संदेह और गहरा गया।

वृहद संदर्भ में बात करते हुए राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के उदाहरण को उठाया, जहां लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन ने 48 में से 30 सीटें जीती थीं, लेकिन पांच महीने बाद विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन बुरी तरह गिर गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पांच महीने में एक करोड़ नए वोटर कैसे जुड़ गए, जबकि इतने वोटर पिछले पांच वर्षों में नहीं जुड़े थे। बूथ एजेंटों के अनुसार, मतदान में कोई खास तेजी नहीं थी, जबकि चुनाव आयोग ने “ब्रिस्क वोटिंग” का दावा किया।

उन्होंने हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसे ही ट्रेंड्स की ओर इशारा करते हुए इसे चुनावी धांधली का एक बड़ा और संगठित प्रयास बताया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब “निष्पक्ष अम्पायर” नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र को खत्म करने वाली ताकतों के साथ खड़ा हो गया है। उन्होंने न्यायपालिका से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

इस पर चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे निर्वाचन नियम 1960 के नियम 20 के तहत शपथपत्र भरकर दें, जिसमें फर्जी नाम, पते, भाग संख्या और अन्य विवरण स्पष्ट हों। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी से शाम तक यह घोषणा-पत्र जमा करने को कहा है, यह चेतावनी देते हुए कि झूठा शपथ-पत्र देना RP एक्ट 1950 की धारा 31 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 227 के तहत दंडनीय अपराध है।

वहीं भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि वे चुनावी पराजय के बाद मानसिक संतुलन खो बैठे हैं।

चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर देशभर की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह विवाद भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को परिभाषित करने वाला अध्याय साबित हो सकता है।

यह समाचार वेब मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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