वर्ष 2034 तक सहकारिता क्षेत्र की जीडीपी में तीन गुणा वृद्धि सुनिश्चित करेगी राष्ट्रीय सहकारिता नीति: डॉ. अरविंद शर्मा

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हरियाणा के सहकारिता, विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत मिशन के तहत ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को राष्ट्रीय सहकारिता नीति के माध्यम से रफ्तार दी जाएगी। यह नीति वर्ष 2034 तक देश के सहकारिता क्षेत्र की जीडीपी में तीन गुणा वृद्धि सुनिश्चित करेगी, जिसमें हरियाणा भी अहम योगदान देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में गरीब और वंचित वर्ग को अवसरों के साथ देश के आर्थिक ढांचे में सशक्त भागीदारी दी जाएगी।

वीरवार देर शाम गुरुग्राम में लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारी अनुसंधान एवं विकास अकादमी (लिनाक) व सहकार भारती के तत्वावधान में सहकार कार्यकर्ताओं व विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि देश में लंबे समय से सहकार आंदोलन निष्क्रिय स्थिति में था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और ‘सहकार से समृद्धि’ के आह्वान से पुनर्जीवित किया है। वर्ष 2021 में मंत्रालय के गठन के बाद राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर हुए सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है कि आज सहकार आंदोलन न केवल पुनः सक्रिय हुआ है, बल्कि अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक बन रहा है। इससे युवाओं, महिलाओं और किसानों को आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह मिली है।

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित राष्ट्रीय सहकारिता नीति को ऐतिहासिक कदम बताते हुए डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि गुजरात के आणंद में देश के पहले सहकारिता विश्वविद्यालय की नींव और इस नई नीति के क्रियान्वयन से दूरदर्शिता, व्यावहारिकता और परिणाम आधारित निर्णयों के माध्यम से वर्ष 2034 तक सहकारिता क्षेत्र की जीडीपी में तीन गुणा वृद्धि तय है।

सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सहकारिता नीति के केंद्र में गांव, कृषि, ग्रामीण महिलाएं, दलित, युवाओं को प्राथमिकता पर अपार अवसर प्राप्त होंगे। पर्यटन से लेकर परिवहन, बीमा क्षेत्र से लेकर हरित क्षेत्र जैसे उभरते क्षेत्रों में सहकारी इकाइयों की भागीदारी होने से इनसे जुड़े करोड़ों सहकार बन्धुओं को लाभ पहुंचेगा। इससे एक बड़ा व मजबूत सहकारी इकोसिस्टम तैयार होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी नीति के तहत राज्य सहकारी बैंकों के माध्यम से हर तहसील में 5-5 मॉडल सहकारी गांव विकसित करने के लक्ष्य पर काम किया जाएगा, ताकि ग्राम्य जीवन में आत्मनिर्भरता की भावना को सशक्त बनाया जा सके। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व की सरकार राष्ट्रीय सहकारिता नीति में स्थानीय आवश्यकताओं को स्थान देते हुए शीघ्र लागू करते हुए सभी भागीदार संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी और देश की अर्थव्यवस्था व लक्ष्यों के अनुरूप अपना योगदान देना सुनिश्चित करेगी।

सहकार भारती के संरक्षक व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डीएन ठाकुर ने सुझाव दिया कि प्रदेश में तहसील से लेकर गांव स्तर तक सहकारिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि राष्ट्रीय सहकारिता नीति की भावना को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर अकादमी के महानिदेशक डॉ. मनोज कुमार सहित विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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