नशे की गिरफ्त में सिमटता युवाओं का भविष्य, समाज और परिवार पर भी पड़ रहा गहरा असर: ठाकुर गुणीप्रकाश

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प्रदेशाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (मान) ठाकुर गुणीप्रकाश ने कहा है कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति आज केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नशे की चपेट में आकर देश की युवा पीढ़ी अपना स्वास्थ्य, करियर, परिवार और भविष्य दांव पर लगा रही है, जिसके दूरगामी परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ रहे हैं।

ठाकुर गुणीप्रकाश ने कहा कि नशीले पदार्थों की लत युवाओं को धीरे-धीरे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना देती है। उन्होंने कहा कि लगातार नशे का सेवन फेफड़ों, लीवर और हृदय जैसी महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होने लगती है, जिससे व्यक्ति विभिन्न बीमारियों का आसानी से शिकार बन जाता है।

उन्होंने कहा कि नशे का सबसे अधिक असर व्यक्ति की मानसिक क्षमता पर पड़ता है। इससे सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित होती है, आत्म-नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है और अवसाद, तनाव, चिड़चिड़ापन तथा याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं जन्म लेने लगती हैं। कई मामलों में युवा हिंसक प्रवृत्ति की ओर भी बढ़ जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि नशे की लत युवाओं के शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। पढ़ाई और रोजगार से ध्यान भटकने के कारण उनकी कार्यक्षमता घट जाती है, जिससे शिक्षा अधूरी रह जाती है, नौकरी छूट जाती है और बेरोजगारी की समस्या सामने खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति युवाओं को निराशा और असुरक्षा की ओर धकेलती है।

उन्होंने आर्थिक पहलू पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशे की आदत पूरी करने के लिए कई युवा अपनी वर्षों की जमा-पूंजी गंवा देते हैं। कई बार आर्थिक तंगी के चलते वे चोरी, लूट और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो जाते हैं, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो जाता है।

ठाकुर गुणीप्रकाश ने कहा कि नशे का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। घरों में तनाव, आर्थिक संकट, रिश्तों में दरार और सामाजिक बदनामी जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ केवल सरकारी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को भी मिलकर जागरूकता अभियान चलाना होगा।

उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और जीवन में सकारात्मक लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति या परिवार का सदस्य नशे की समस्या से जूझ रहा है, तो उसे छिपाने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय उपचार, काउंसलिंग और नशामुक्ति केंद्रों की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सही समय पर मिला उपचार और परिवार का सहयोग किसी भी व्यक्ति को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उसे सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर वापस ले जा सकता है।

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