पाकिस्तान में रह रहे भारतीय नागरिक जल्द लौटें वतन, सरकार ने जारी की सख्त सलाह

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पुलवामा के बाद अब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को एक बार फिर नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान जाने के बाद भारत ने कड़ा और निर्णायक रुख अपनाया है। इसी क्रम में गुरुवार को भारत सरकार ने पाकिस्तान के नागरिकों को जारी किए गए सभी प्रकार के वीज़ा को रद्द करने का फैसला लिया है। यह कदम न केवल सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की आतंकवाद के विरुद्ध ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति को भी उजागर करता है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को तत्काल प्रभाव से भारत लौटने की सलाह दी जाती है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं और सीमा पार से बार-बार हो रहे आतंकी हमलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। भारत में जो पाकिस्तानी नागरिक मेडिकल वीज़ा पर आए हुए हैं, उन्हें भी 29 अप्रैल तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। वहीं अन्य पाकिस्तानी नागरिकों के पास केवल 72 घंटे हैं भारत छोड़ने के लिए।

भारत सरकार के इस फैसले में सिर्फ वीज़ा रद्दीकरण ही नहीं, बल्कि 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा शामिल है। यह कदम तब तक प्रभावी रहेगा जब तक पाकिस्तान अपने आतंकवाद समर्थन के रवैये से सार्वजनिक और विश्वसनीय रूप से पीछे नहीं हटता। साथ ही पंजाब के अटारी में स्थित एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) को भी तत्काल बंद कर दिया गया है। हालांकि जिन यात्रियों ने वैध अनुमति के तहत भारत में प्रवेश किया है, उन्हें 1 मई तक उसी मार्ग से वापसी की अनुमति दी गई है।

भारत के इन कड़े फैसलों पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इस्लामाबाद ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) वीज़ा छूट योजना के अंतर्गत सभी वीज़ा निलंबित कर दिए हैं, सिर्फ सिख धार्मिक यात्रियों को छूट दी गई है। इसके अलावा, भारत के रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को “अवांछनीय व्यक्ति” घोषित कर 30 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद और उसकी छाया में पलने वाली कूटनीति को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। यह स्थिति भारत-पाकिस्तान के आम नागरिकों को भी प्रभावित करेगी, विशेषकर वे जो पारिवारिक मुलाकातों, चिकित्सा उपचार या व्यापारिक उद्देश्यों से एक-दूसरे के देश यात्रा करते हैं।

भारत का यह रुख स्पष्ट संकेत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। आने वाले समय में इस नीति के प्रभाव क्षेत्रीय संतुलन से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक देखने को मिल सकते हैं।

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यह एक ऑटो वेब जनरेटेड न्यूज़ वेब स्टोरी है।

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