हरियाणा, जो कभी अपने असंतुलित लिंगानुपात के लिए जाना जाता था, अब इस गंभीर सामाजिक चुनौती से निपटने के लिए दृढ़ता से प्रयास कर रहा है। राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साप्ताहिक बैठक में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में, अवैध गर्भपात पर लगाम लगाने और लिंगानुपात को और बेहतर बनाने के प्रयासों को तेज करने पर विशेष बल दिया गया। यह पहल ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को एक नई गति देने के उद्देश्य से की जा रही है, जो भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है।
बैठक के दौरान, अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अवैध गर्भपात की प्रथाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ऐसे कृत्यों में शामिल पाए जाने वाले दोषी डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करने के निर्देश दिए। यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस अवैध और अनैतिक कार्य के प्रति कोई नरमी नहीं बरतेगी।
हालिया कार्रवाइयों से इस अभियान की गंभीरता झलकती है। 20 मई से 26 मई 2025 के बीच राज्यभर में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) किट्स की अवैध बिक्री पर व्यापक छापेमारी की गई। इस दौरान 1787 एमटीपी किट्स जब्त की गईं और 6 एफआईआर दर्ज की गईं। इसके अलावा, अवैध गतिविधियों के चलते 3 दुकानों को सील कर दिया गया। एक महीने के भीतर हरियाणा में एमटीपी किट्स बेचने वाले थोक विक्रेताओं की संख्या 32 से घटाकर मात्र 6 कर दी गई है, जो इस अवैध व्यापार पर कड़ा प्रहार है। तीन मामलों में एमटीपी किट्स की अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें भी मिलीं, जबकि 2 फर्मों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किए गए। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, राज्य के 14 जिलों में एमटीपी किट्स की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अवैध गर्भपात में लिप्त बीएएमएस डॉक्टरों और झोलाछाप चिकित्सकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) को जवाबदेह बनाने का निर्देश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके क्षेत्र में कोई भी अवैध गर्भपात न हो। यह भी निर्देश दिए गए कि एसएमओ हर मंगलवार को चिकित्सा अधिकारियों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक करें और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हर बुधवार को एसएमओ के साथ बैठक कर अवैध गर्भपात रोकथाम और लिंगानुपात सुधार की साप्ताहिक समीक्षा करें। जवाबदेही बढ़ाने के लिए, राज्य के 122 सीएचसी के अंतर्गत कार्यरत 686 सब रजिस्ट्रार को भी यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बैठक में अधिकारियों को राज्यभर में संचालित आईवीएफ केंद्रों के पंजीकरण डेटा को पुनः सत्यापित करने और उनके कार्यों की कड़ी निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि को रोका जा सके। नियमों का सख्ती से पालन कराने और उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए। इसके अतिरिक्त, गांवों और झुग्गी क्षेत्रों में जहां प्रवासी आबादी अधिक है, वहां अधिक से अधिक जन्म पंजीकरण शिविर आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया, ताकि राज्य में जन्म लेने वाला कोई भी बच्चा बिना पंजीकरण के न रहे।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। फरीदाबाद, सोनीपत और नूंह जिलों की पीओ (आईसीडीएस)/सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए, क्योंकि इन जिलों में गर्भवती महिलाओं को परामर्श देने के लिए आशा या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को ‘सहेली’ के रूप में नियुक्त नहीं किया गया था।
महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे गांवों में सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों को तेज करें, जिसमें ‘लाड़ो पंचायत’ और ‘कुआं पूजन’ जैसे पारंपरिक कार्यक्रमों को शामिल किया जाए। साथ ही, नवजात बालिकाओं वाले परिवारों को उपायुक्तों द्वारा सम्मानित किया जाए। इन पहलों का उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाना है, जिससे हरियाणा में लिंगानुपात में और सुधार लाया जा सके।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक श्री रिपुदमन सिंह ढिल्लों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जो इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर सरकार के सामूहिक और समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
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