स्कूली शिक्षा में चमका चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब ने भी किया बेहतरीन प्रदर्शन, हरियाणा और हिमाचल ने दर्ज की बड़ी प्रगति

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देश भर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मापने वाले परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2023-24 के ताजा आंकड़े सामने आ चुके हैं और इस बार का परिणाम उत्तरी राज्यों के लिए गर्व का कारण बना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट में चंडीगढ़ ने शीर्ष स्थान हासिल करते हुए पूरे देश में पहला स्थान पाया है। PGI में 703 अंकों के साथ चंडीगढ़ ने न केवल अपने पिछले स्कोर को पीछे छोड़ा, बल्कि प्राचेष्ठा-1 श्रेणी में शामिल होने वाला देश का इकलौता केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।

वर्ष 2022-23 में चंडीगढ़ का स्कोर 687.8 था, जबकि इस बार यह बढ़कर 703 हो गया है, जो शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों की पुष्टि करता है। चंडीगढ़ का यह प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि नीति और जमीनी कार्यान्वयन के संतुलन की मिसाल भी पेश करता है। चंडीगढ़ में स्कूली शिक्षा के हर स्तर पर की गई तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों ने इसके परिणामों को बेहतर बनाया है।

दिल्ली और पंजाब ने भी PGI में शानदार प्रदर्शन किया है। दिल्ली ने 44 अंकों की बढ़त के साथ 623.7 अंक प्राप्त किए, जो उसके शिक्षा क्षेत्र में हो रहे लगातार सुधारों का प्रमाण है। पंजाब भी पीछे नहीं रहा, जिसने 631.2 अंकों के साथ ग्रेड-3 में अपनी जगह बनाई है। इन दोनों राज्यों ने Prachesta-3 कैटेगरी में स्थान पाया, जो दर्शाता है कि इनकी नीतियां और योजनाएं शिक्षा सुधार की दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।

हरियाणा ने भी बेहतर प्रगति की है। इसने Prachesta-3 कैटेगरी में जगह बनाते हुए 600 से अधिक स्कोर दर्ज किया है। हरियाणा में शिक्षा के लिए चल रहे डिजिटलीकरण, शिक्षक प्रशिक्षण और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के प्रयासों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं हिमाचल प्रदेश ने 41 अंकों की बढ़त दर्ज की है, जो पर्वतीय राज्य के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। सीमित संसाधनों के बावजूद हिमाचल का शिक्षा के प्रति समर्पण और राज्य सरकार की सक्रियता इसे राष्ट्रीय शिक्षा नक्शे पर एक मजबूत स्थान दिला रही है।

हालांकि, कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गिरावट भी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी गिरावट अंडमान-निकोबार में 43 अंकों की रही, जबकि पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, बिहार और केरल जैसे राज्यों ने भी नकारात्मक ग्राफ दिखाया है। इसके ठीक उलट, उत्तर भारत के राज्य स्थिरता और वृद्धि की ओर अग्रसर हैं, जो केंद्र और राज्य सरकारों के तालमेल का परिणाम है।

PGI को शिक्षा मंत्रालय ने 2017-18 में शुरू किया था, जिसका उद्देश्य डेटा आधारित एनालिसिस के माध्यम से स्कूल एजुकेशन की गुणवत्ता को मापना है। हर साल राज्यों को 1000 अंकों की स्केल पर ग्रेड दिया जाता है। इस बार मेघालय सबसे खराब प्रदर्शन करते हुए 417 स्कोर के साथ आकांक्षी-3 श्रेणी में अकेला राज्य बन गया है।

इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सही नीतिगत दिशा, पारदर्शी कार्यान्वयन और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के बल पर उत्तरी भारत के राज्य शिक्षा सुधार में देश के लिए मिसाल बन सकते हैं। विशेष रूप से चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य स्कूली शिक्षा में हो रही वास्तविक प्रगति के प्रतीक बनकर उभर रहे हैं।

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