चीन, सेना और नरेंद्र मोदी की ‘56 इंच की छाती’ पर राहुल गांधी का सीधा हमला, सरकार कठघरे में

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संसद के भीतर बोलने से रोके जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदन के बाहर जो सवाल उठाए, उन्होंने एक बार फिर सरकार और खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सीधे राजनीतिक कठघरे में खड़ा कर दिया। मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे कोई निजी आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि देश के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की बातों का हवाला दे रहे हैं, जो उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखी हैं। राहुल का कहना था कि यही वह किताब है, जिसे आज तक प्रकाशित होने की अनुमति नहीं दी जा रही और जो जानबूझकर लंबित रखी गई है।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार और सत्ता पक्ष एक पूर्व आर्मी चीफ की लिखी बातों से इतने डरे हुए क्यों हैं। उन्होंने कहा कि यह जनरल नरवणे का दृष्टिकोण है, उनका नजरिया है, जिसे देश के सामने आना चाहिए। लोग इससे सीखेंगे, न सिर्फ सेना के बारे में बल्कि राजनीतिक नेतृत्व के फैसलों और उनकी भूमिका के बारे में भी। राहुल ने साफ शब्दों में कहा कि अगर यह किताब सार्वजनिक हो गई, तो देश को प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के फैसलों की वास्तविक तस्वीर समझ में आएगी। साथ ही यह भी सामने आएगा कि कठिन समय में सेना को किस तरह राजनीतिक नेतृत्व की ओर से निराशा झेलनी पड़ी।

राहुल गांधी का तर्क है कि वे किसी गोपनीय दस्तावेज या अप्रकाशित स्रोत से नहीं बोल रहे। उन्होंने कहा कि जनरल नरवणे की किताब के अंश पहले ही एक लेख के रूप में सामने आ चुके हैं और वही वे उद्धृत कर रहे थे। इसके बावजूद उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया गया। राहुल ने दोहराया कि उन्होंने यह बातें खुद नहीं लिखीं, बल्कि देश के पूर्व थलसेना प्रमुख ने अपने अनुभव और आकलन के आधार पर लिखा है। सवाल यह है कि अगर यह सब एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का नजरिया है, तो सरकार उसे जनता से छिपाना क्यों चाहती है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में चीन के साथ सीमा तनाव का मुद्दा है। राहुल गांधी ने बेहद तीखे शब्दों में पूछा कि जब चीन हमारे सामने खड़ा था और आगे बढ़ रहा था, तब प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार दिखाए गए ‘56 इंच की छाती’ वाले दावे का क्या हुआ। उनका कहना था कि देश को यह जानने का हक है कि उस समय राजनीतिक नेतृत्व ने क्या फैसले लिए और सेना को किस तरह के निर्देश मिले। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार जानकारी देने से बचती रही है और सच को नैरेटिव स्पिनिंग के जरिए ढकने की कोशिश की गई।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी का यह रवैया नया नहीं है। अतीत में भी सरकार ने कई अहम मुद्दों पर पूरी जानकारी देशवासियों के सामने रखने से परहेज किया है। चाहे वह चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हालात हों या रक्षा से जुड़े बड़े नीतिगत फैसले, सरकार हमेशा सवालों से बचती नजर आई है। राहुल के मुताबिक, वे बार-बार यही सवाल उठाते रहे हैं कि देश की सुरक्षा और सेना से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता क्यों नहीं है।

इस बार राहुल का हमला इसलिए भी ज्यादा तीखा माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम लेकर सवाल किए। उनका कहना है कि अगर जनरल नरवणे की किताब सामने आ गई, तो लोगों को यह समझ में आ जाएगा कि उस दौर में किस स्तर पर फैसले लिए गए और जिम्मेदारी किसकी थी। राहुल ने दावा किया कि इसी डर की वजह से सरकार इस किताब को सार्वजनिक होने से रोक रही है।

राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो राहुल गांधी के इस बयान के बाद भाजपा रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रही है। सत्ता पक्ष इसे नियमों और प्रक्रियाओं का मामला बताकर टालना चाहता है, जबकि विपक्ष इसे सच्चाई छिपाने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है। चीन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ‘56 इंच की छाती’ का सवाल उठाकर राहुल गांधी ने भाजपा के सबसे मजबूत राजनीतिक प्रतीक को ही निशाने पर ले लिया है।

यह विवाद अब सिर्फ एक किताब या संसद में दिए गए बयान तक सीमित नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर सरकार की विश्वसनीयता, राष्ट्रीय सुरक्षा पर उसकी जवाबदेही और जनता के सामने सच रखने की उसकी इच्छा पर सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी के ताजा हमले ने साफ कर दिया है कि चीन मुद्दे पर भाजपा को आने वाले दिनों में और भी तीखे राजनीतिक सवालों का सामना करना पड़ सकता है, और यही वजह है कि यह बहस अब और ज्यादा तेज होने के संकेत दे रही है।

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