जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र आरएस पुरा स्थित ऑब्जर्वेशन होम से फरार हुए कैदियों के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एक समन्वित और हाई-प्रोफाइल संयुक्त अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने दो पाकिस्तानी नाबालिगों को पंजाब से गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा स्थानीय गैंगस्टर करनजीत सिंह उर्फ गुग्गू अब भी गिरफ्त से बाहर है। यह मामला न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पंजाब की कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा से जुड़े तंत्र के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
सोमवार शाम करीब 5:15 बजे आरएस पुरा के ऑब्जर्वेशन होम में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर तीन बंदी फरार हो गए थे। इनमें दो पाकिस्तानी नागरिक बताए जा रहे नाबालिग और एक कुख्यात स्थानीय गैंगस्टर शामिल था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फरारी सुनियोजित थी और मौके का फायदा उठाकर सुरक्षाकर्मियों को धक्का देकर और मारपीट कर तीनों आरोपी सुरक्षा घेरा तोड़ने में सफल रहे। घटना के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अलर्ट जारी करते हुए पंजाब पुलिस समेत विभिन्न एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया।
तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और जमीनी खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस टीमों ने पंजाब के विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दी। कई घंटों की सघन तलाश के बाद दोनों पाकिस्तानी नाबालिगों को पंजाब के एक इलाके से हिरासत में लिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपी छिपकर आगे किसी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में थे, लेकिन संयुक्त ऑपरेशन के चलते वे ज्यादा दूर नहीं जा सके। अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जा सके।
यह पूरा मामला सीमा पार से जुड़े सुरक्षा आयामों के कारण और भी संवेदनशील हो गया है। जिन दो नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया है, वे कथित रूप से पाकिस्तान से घुसपैठ के आरोप में पहले से हिरासत में थे। ऐसे में उनका फरार होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि फरारी में किसी बाहरी नेटवर्क या स्थानीय मददगार की भूमिका तो नहीं रही।
इस बीच, ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में ऑब्जर्वेशन होम में तैनात छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह कदम यह संकेत देता है कि सुरक्षा में चूक को गंभीरता से लिया जा रहा है। वर्ष 1988 में स्थापित यह ऑब्जर्वेशन होम सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा संचालित किया जाता है और यहां कानून का उल्लंघन करने वाले नाबालिगों को रखा जाता है। हालांकि, हालिया घटना ने इस संस्थान की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ी चिंता का विषय गैंगस्टर करनजीत सिंह उर्फ गुग्गू की फरारी है। आरएस पुरा के दबलेहर गांव का निवासी गुग्गू पहले से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है और स्थानीय स्तर पर उसका नेटवर्क सक्रिय बताया जाता है। फरारी के तुरंत बाद उसने गांव के समीप एक युवक से मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल छीन ली थी। जानकारी के अनुसार, उसी मोबाइल से उसने अपनी मां से संपर्क भी किया था। पुलिस ने बाद में लूटा गया फोन और बाइक बरामद कर ली, लेकिन गुग्गू का कोई ठोस सुराग अभी तक नहीं मिला है।
मामले को और रहस्यमयी बनाता है गुग्गू की मां का अचानक लापता हो जाना। मंगलवार से वह अपने घर से गायब बताई जा रही है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या मां की गुमशुदगी फरारी की योजना का हिस्सा थी या उसे जानबूझकर कहीं छिपाया गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि गैंगस्टर को स्थानीय स्तर पर मदद मिल रही है और संभव है कि वह पंजाब या सीमावर्ती क्षेत्र में छिपा हो।
पंजाब पुलिस ने भी सीमावर्ती जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में नाकेबंदी, संदिग्ध वाहनों की जांच और खुफिया तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना से इनकार नहीं कर रहीं कि फरार गैंगस्टर किसी बड़े आपराधिक गिरोह या सीमा पार नेटवर्क से संपर्क साधने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में उसकी जल्द गिरफ्तारी कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों के दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है।
यह घटना इस बात का भी संकेत है कि संवेदनशील कैदियों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाओं को और सख्त करने की आवश्यकता है। खासकर जब मामला सीमा पार के तत्वों और संगठित अपराध से जुड़ा हो, तब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती। फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी से पुलिस को आंशिक सफलता मिली है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी तक यह मामला खुला ही माना जाएगा।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की संयुक्त कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार की आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि के खिलाफ समन्वित रणनीति अपनाने को तैयार हैं। अब सबकी नजरें गैंगस्टर गुग्गू की गिरफ्तारी और इस पूरे नेटवर्क के खुलासे पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह महज एक फरारी थी या इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र छिपा है।

