खाड़ी संकट का असर पंजाब तक: गैस की कमी से आम लोग परेशान, समाधान की मांग तेज

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मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के आम लोगों तक महसूस होने लगा है। United States और Israel द्वारा Iran और खाड़ी क्षेत्र में जारी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। इसके चलते देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीजल और विशेष रूप से एलपीजी गैस की उपलब्धता प्रभावित होने लगी है। पंजाब में स्थिति और अधिक चिंताजनक होती दिखाई दे रही है, जहां गैस की कमी ने आम लोगों और कारोबार दोनों को परेशानी में डाल दिया है।

सूत्रों के अनुसार देश की प्रमुख गैस कंपनियों ने फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भारी कटौती कर दी है। 5 किलो, 19 किलो और 425 किलो के जंबो कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल, ढाबे, छोटे उद्योग और अन्य व्यावसायिक संस्थान सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। पंजाब के प्रमुख औद्योगिक शहरों में कई कारोबारियों ने चिंता जताई है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले दिनों में व्यापार और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि गैस कंपनियों के प्लांट्स पर कमर्शियल सिलेंडर भरवाने के लिए वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। इसके बावजूद डीलरों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। कई गैस एजेंसियों को कंपनियों की ओर से स्पष्ट जवाब दिया जा रहा है कि फिलहाल सप्लाई सीमित है और प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही है। इससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कुछ नए नियम और शर्तें लागू की हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों में गैस की कमी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कई जगहों पर उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

सोमवार को कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं। सुबह से लेकर देर शाम तक उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों के चक्कर लगाते रहे। कई लोग एक सिलेंडर हासिल करने के लिए सिफारिशों और जान-पहचान का सहारा लेते नजर आए। इससे साफ है कि आम लोगों के बीच गैस आपूर्ति को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।

औद्योगिक संगठनों और व्यापार मंडलों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि उद्योग, व्यापार और रोजगार पर भी पड़ेगा। कई छोटे उद्योग ऐसे हैं जो अपनी उत्पादन प्रक्रिया में एलपीजी गैस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने से उत्पादन रुक सकता है और मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी संकट आ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला पर और अधिक दबाव पड़ सकता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

इन हालातों के बीच अब लोगों और व्यापारिक संगठनों की नजर केंद्र सरकार पर टिक गई है। उनका कहना है कि स्थिति को गंभीर होने से पहले नियंत्रित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है। ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने और बाजार में घबराहट की स्थिति को रोकने के लिए प्रभावी नीति और स्पष्ट रणनीति जरूरी बताई जा रही है।

पंजाब सहित देश के कई हिस्सों में गैस की कमी से पैदा हो रही परेशानियों को देखते हुए अब यह मांग उठने लगी है कि Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जल्द ही इस संकट का स्थायी समाधान सामने लाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं, जिसका असर सीधे आम नागरिकों के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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