मार्च में बदला हिमाचल का मौसम: बारिश-बर्फबारी से लौटी कड़ाके की ठंड, जनजीवन प्रभावित तो पर्यटन को उम्मीद

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शिमला: हिमाचल प्रदेश में मौसम ने अप्रत्याशित रूप से करवट लेते हुए पूरे राज्य को एक बार फिर शीतलहर जैसे हालात में पहुंचा दिया है। जहां मार्च के मध्य तक तापमान में तेजी से वृद्धि के कारण गर्मी का असर महसूस किया जा रहा था, वहीं पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने दिसंबर-जनवरी जैसी ठंड का एहसास करा दिया है।

राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे Manali, Lahaul-Spiti और Shimla के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार खराब मौसम बना हुआ है। हालांकि गुरुवार को कुछ समय के लिए मौसम साफ हुआ, लेकिन आसमान में बादल छाए रहने के साथ रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है।

भारी बर्फबारी के चलते Atal Tunnel के आसपास हालात बिगड़ गए हैं, जिसके कारण Leh-Manali Highway को एहतियातन बंद करना पड़ा। इससे लद्दाख और हिमाचल के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। वहीं, कुल्लू जिले के मणिकर्ण क्षेत्र में भूस्खलन की घटना सामने आई है, जिससे प्रमुख सड़क मार्ग बाधित हो गया और कई पर्यटक रास्ते में फंस गए। स्थानीय प्रशासन से सड़क को जल्द बहाल करने की मांग तेज हो गई है।

India Meteorological Department के शिमला केंद्र ने 20 मार्च के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार 21 और 22 मार्च को भी वर्षा का क्रम जारी रहेगा, हालांकि इन दिनों के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में उल्लेखनीय वर्षा दर्ज की गई। मनाली में सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि चंबा, किन्नौर, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में भी मध्यम से भारी बारिश हुई। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी ने मौसम को और अधिक ठंडा बना दिया है। लाहौल घाटी के कई हिस्सों में ताजा हिमपात दर्ज किया गया, जिससे तापमान में गिरावट आई है और सर्द हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है।

तापमान की बात करें तो प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे चला गया है, जिससे ठंड का प्रभाव और अधिक गहरा गया है। वहीं निचले क्षेत्रों में भी तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि दिन के समय कुछ स्थानों पर हल्की गर्माहट बनी हुई है।

इस बदले हुए मौसम का असर जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने, भूस्खलन और यातायात प्रभावित होने के कारण स्थानीय लोगों और पर्यटकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।

हालांकि, इस मौसम परिवर्तन ने पर्यटन क्षेत्र के लिए नई उम्मीदें भी जगाई हैं। सर्दियों में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी के कारण पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ था, लेकिन मार्च में हुई ताजा बर्फबारी को कारोबार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बर्फबारी प्रमुख आकर्षण होती है।

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में मौसम का यह अचानक बदलाव जहां एक ओर चुनौती लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर यह पर्यटन उद्योग के लिए संभावनाओं के नए द्वार भी खोल रहा है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर राज्य के जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों की गति काफी हद तक निर्भर करेगी।

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