आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के व्यावहारिक अध्ययन और उसके व्यापक स्वरूप को समझने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया, जिसमें जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) के बीएएमएस सत्र 2023-24 के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरे ने विद्यार्थियों को न केवल आयुर्वेद की परंपरागत जड़ों से जोड़ने का अवसर दिया, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इसके समन्वय को भी करीब से समझने का मौका प्रदान किया।
दौरे के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान के प्रशासनिक खंड, औषधीय उद्यान और अस्पताल परिसर का विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने बाह्य रोगी विभाग और आंतरिक रोगी विभाग के साथ-साथ पंचकर्म, भौतिक चिकित्सा और औषध निर्माण इकाइयों को भी देखा। इस दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि आयुर्वेद केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र जीवन शैली का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें शरीर, मन और प्रकृति के बीच संतुलन को महत्व दिया जाता है।
विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए संस्थान के डीन प्रभारी प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच आयुर्वेद की उपयोगिता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन जीने की एक वैज्ञानिक और संतुलित पद्धति है। उन्होंने औषधीय पौधों के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि संस्थान के उद्यान में मौजूद विभिन्न जड़ी-बूटियां उपचार में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही हैं। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के संवर्धन की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी देते हुए प्रोफेसर गंधर्व ने बताया कि कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में बीएएमएस पाठ्यक्रम के साथ पंचकर्म जैसे विशिष्ट पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, समय की मांग के अनुरूप नए पाठ्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को आयुर्वेद के क्षेत्र में और अधिक विशेषज्ञता प्राप्त हो सके।
संस्थान के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गौरव गर्ग ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहां 12 विशेष बाह्य रोगी सेवाएं संचालित हो रही हैं और आंतरिक रोगी सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अनुभवी चिकित्सकों की देखरेख में रोगियों को समुचित परामर्श और उपचार प्रदान किया जा रहा है। प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज यहां स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जो इस संस्थान की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान द्रव्य गुण विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मनीष पमनानी ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें औषधीय पौधों के विभिन्न उपयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के समन्वय से आयुर्वेद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में संस्थान के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षक भी उपस्थित रहे, जिनमें शरीर रचना विभाग के विभागाध्यक्ष एवं छात्रावास अधीक्षक प्रोफेसर प्रह्लाद रघु, रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. समित मसंद, तथा जयपुर से आए सहायक प्रोफेसर डॉ. रितेश रामनानी और डॉ. तरुण शर्मा शामिल थे।
यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुई, जिसने उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा की गहराई, उसकी प्रासंगिकता और भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराया। साथ ही, इस पहल ने यह भी स्पष्ट किया कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थायी और प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

