अगले 72 घंटे हिमाचल पर भारी: मंडी, कांगड़ा और सिरमौर में तबाही की आशंका

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6 जुलाई से मूसलधार बारिश की चेतावनी, रेड अलर्ट के घेरे में मंडी, कांगड़ा और सिरमौर—बाढ़ और भूस्खलन की आशंका चरम पर

हिमाचल प्रदेश एक बार फिर भीषण बारिश की चपेट में आने को तैयार है और इस बार स्थिति पहले से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे जनजीवन पर एक बार फिर खतरे के बादल गहराने लगे हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय मंडी, कांगड़ा और सिरमौर जिलों को लेकर है, जहां 6 जुलाई की दोपहर से लेकर 7 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस अवधि में ऐसे हालात बन सकते हैं, जो बाढ़, भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने जैसे संकटों को जन्म दे सकते हैं।

पिछले सप्ताह की बारिश ने पहले ही मंडी और उसके आसपास के क्षेत्रों को झकझोर कर रख दिया था। 30 जून और 1 जुलाई को जो तबाही वहां हुई, उसके जख्म अभी भरे भी नहीं हैं कि प्रकृति एक और प्रहार के लिए तैयार खड़ी है। जिन इलाकों में हाल ही में जीवन सामान्य होने की कोशिश कर रहा था, वहां एक बार फिर राहत कार्यों पर रोक लगने और संकट के गहराने की आशंका बढ़ गई है।

मौसम विभाग के शिमला स्थित केंद्र ने यह भी संकेत दिया है कि सिर्फ मंडी, कांगड़ा और सिरमौर ही नहीं, बल्कि चंबा, कुल्लू, शिमला, सोलन, बिलासपुर और हमीरपुर जैसे जिलों में भी बहुत भारी बारिश की संभावना है। इन सभी क्षेत्रों के लिए 7 और 8 जुलाई तक ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है, जो यह दर्शाता है कि हालात किसी भी समय विकराल रूप ले सकते हैं। दक्षिण-पश्चिमी मानसून अब पूरी तरह हिमाचल में सक्रिय हो चुका है और आने वाले दो से तीन दिन इसके तीव्र असर से कोई भी इलाका अछूता नहीं रहेगा।

इस चेतावनी के बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्थानीय लोगों और पर्यटकों से आग्रह किया गया है कि वे अनावश्यक यात्रा न करें, नदी-नालों से दूर रहें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी गई है, लेकिन प्राकृतिक आपदा के सामने तैयारियां अक्सर नाकाफी साबित होती रही हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का मतलब सिर्फ पानी की अधिकता नहीं है, यह उन दुर्गम इलाकों में ज़िंदगी के रुक जाने जैसा होता है। सड़कें धंस जाती हैं, गांवों का संपर्क टूट जाता है और राहत कार्य तक पहुंच पाना नामुमकिन हो जाता है। खासकर मंडी और सिरमौर जैसे इलाकों में जहां भूगर्भीय अस्थिरता पहले से मौजूद है, वहां इस प्रकार की बारिश विनाश का कारण बन सकती है।

प्रदेश पहले ही मानसून के कारण कृषि, आवास और बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान से जूझ रहा है। अब एक और ऐसे चक्रवातीय दौर की शुरुआत जिसमें तेज बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं, स्थिति को और भी चुनौतीपूर्ण बना रही है। हिमाचल की खूबसूरत वादियों में फिलहाल नज़ारे तो बादलों के हैं, लेकिन पीछे छिपा हुआ भय हर नागरिक के मन में घर कर चुका है।

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