उत्तर भारत में तेज़ी से बढ़ रहा तापमान, पंजाब-हरियाणा में गर्मी का असर गहरा; हिमाचल में बारिश और बर्फबारी से राहत की संभावना

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उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मार्च के शुरुआती दिनों से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तापमान सामान्य से लगातार ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को दिन के समय कड़ी धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में हीटवेव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में आंशिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इन दिनों साफ आसमान और तेज़ धूप के कारण दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने लगा है, जो सामान्य से कई डिग्री अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बढ़ता तापमान आने वाले सप्ताह में और तेज़ हो सकता है, जिसके चलते लोगों को गर्मी की तीव्रता का सामना करना पड़ सकता है।

हरियाणा की बात करें तो राज्य के कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। हिसार इन दिनों राज्य के सबसे गर्म स्थानों में शामिल रहा, जहां अधिकतम तापमान लगभग 37.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब छह डिग्री अधिक है। इसके अलावा अंबाला, करनाल, गुरुग्राम और भिवानी जैसे शहरों में भी दिन का तापमान लगातार बढ़ रहा है। तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण दिन के समय लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में यह तेजी से बढ़ोतरी रबी फसलों पर भी प्रभाव डाल सकती है, खासकर गेहूं की फसल पर गर्म हवाओं का असर पड़ने की आशंका रहती है।

पंजाब में भी मौसम का रुख इसी तरह का बना हुआ है। लुधियाना, अमृतसर, पटियाला और फरीदकोट सहित कई शहरों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में फिलहाल आसमान साफ रहेगा और अगले कुछ दिनों तक किसी बड़े वर्षा तंत्र की संभावना नहीं है। इसका मतलब है कि दिन के समय तेज धूप और गर्मी का प्रभाव जारी रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी होती रही तो अप्रैल के शुरुआती दिनों में ही हीटवेव जैसी स्थिति बनने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी के बीच पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिज़ाज कुछ अलग नजर आ सकता है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की भी संभावना व्यक्त की गई है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट आ सकती है और ठंडक का एहसास बढ़ सकता है।

हिमाचल प्रदेश के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ी क्षेत्रों में बादल छाए रह सकते हैं और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। इससे जहां पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में कमी आएगी, वहीं मैदानी इलाकों में भी मौसम पर इसका हल्का असर पड़ सकता है। पर्यटन स्थलों पर इस बदलाव का असर साफ देखा जा सकता है, क्योंकि बर्फबारी या बारिश की संभावना पर्यटकों को आकर्षित करती है।

जम्मू-कश्मीर में भी अगले दो से तीन दिनों के दौरान मौसम में बदलाव की संभावना जताई गई है। घाटी के कई इलाकों में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश या ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे ठंड का असर कुछ समय के लिए बढ़ सकता है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत के मौसम में इस समय दो अलग-अलग परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। एक तरफ मैदानी क्षेत्रों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जबकि दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में अस्थायी बदलाव हो रहा है। आने वाले दिनों में यदि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता बढ़ती है तो उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या बादल छाने की स्थिति भी बन सकती है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट संभव है।

हालांकि फिलहाल पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर सहित अधिकांश मैदानी इलाकों में लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय धूप में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीते रहें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च और अप्रैल के दौरान तापमान में तेजी से बढ़ोतरी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की ओर भी संकेत करती है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर भारत में गर्मी का मौसम पहले शुरू होने लगा है। यही कारण है कि मौसम विभाग लगातार तापमान पर निगरानी बनाए हुए है और स्थिति के अनुसार हीटवेव से जुड़े अलर्ट जारी किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर उत्तर भारत इस समय मौसम के दो अलग-अलग रंग देख रहा है—मैदानी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी और पहाड़ी राज्यों में संभावित बारिश तथा बर्फबारी। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और तापमान की दिशा तय करेगी कि उत्तर भारत को गर्मी से राहत मिलती है या फिर हीटवेव का खतरा और बढ़ जाता है।

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