एक फ्लैट, 25 खरीदार और 500 करोड़ की ठगी: गुरुग्राम में रियल एस्टेट की सबसे चौंकाने वाली ‘माइंड गेम’ का पर्दाफाश

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गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम से सामने आया यह मामला केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में रची गई एक सुनियोजित आपराधिक साजिश है, जिसने पुलिस से लेकर निवेशकों तक सभी को चौंका दिया है। एक शातिर कारोबारी ने एक ही फ्लैट को बार-बार बेचकर लगभग 500 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया और वर्षों तक कानून, सिस्टम और निवेशकों को अपने जाल में उलझाए रखा। अब आर्थिक अपराध शाखा की कार्रवाई के बाद इस हाई-प्रोफाइल घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।

मामला गुरुग्राम के सेक्टर-15, पार्ट-2 स्थित चर्चित 32 माइलस्टोन कॉम्प्लेक्स का है। इस परिसर की पहली मंजिल पर स्थित एक व्यावसायिक फ्लैट को आरोपी ने पहले एक कंपनी के साथ एग्रीमेंट टू सेल के जरिए बेचा, लेकिन जानबूझकर उसके नाम कन्वेयंस डीड नहीं करवाई। इसके बाद उसी फ्लैट को टुकड़ों में विभाजित कर 25 अलग-अलग लोगों को बेच दिया गया। हर खरीदार को भरोसा दिलाया गया कि वह एक सुरक्षित और मुनाफे वाला निवेश कर रहा है।

आर्थिक अपराध शाखा-II, गुरुग्राम में 2 जनवरी 2026 को दर्ज इस मामले की जांच के दौरान सामने आया कि शिकायत एमएस ट्रॉम वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दी गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि एमएस अप्रा मोटेल्स, जो बाद में एमएस 32nd विस्टास प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी गई, के डायरेक्टर और शेयरधारकों ने वर्ष 2021 में संपर्क कर खुद को रियल एस्टेट के बड़े खिलाड़ी बताया था। उन्होंने किराया बाजार में “क्रांति” लाने का सपना दिखाया और 32 माइलस्टोन में पहली मंजिल की यूनिट को विशेष बिक्री के लिए पेश किया। इस यूनिट की कीमत 2 करोड़ 50 लाख रुपये तय की गई।

समझौता होने और भुगतान प्राप्त करने के बावजूद आरोपी कंपनी ने यूनिट की कन्वेयंस डीड शिकायतकर्ता के नाम नहीं करवाई। जब लंबे समय तक टालमटोल चलती रही तो 11 सितंबर को कानूनी नोटिस जारी किया गया। इसके बाद जांच में जो सच सामने आया, उसने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया। वर्ष 2022 से 2023 के बीच आरोपी ने उसी यूनिट की 25 अलग-अलग कन्वेयंस डीड विभिन्न लोगों के नाम कर दीं और करोड़ों रुपये समेट लिए।

इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड ध्रुवदत्त शर्मा (34) निकला, जिसे 6 फरवरी को गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड से गिरफ्तार किया गया। आरोपी बीबीए पास है और उसने कॉर्पोरेट संरचनाओं, लीज मॉडल और दस्तावेजी जटिलताओं का इस्तेमाल कर यह ‘माइंड गेम’ रचा। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने एक ही यूनिट को 25 हिस्सों में बेचने के बाद उन्हीं 25 खरीदारों से उस संपत्ति को अपनी फर्म ग्रोथ हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम 30 वर्षों के लिए लीज पर ले लिया। इस तरह उसने कागजों में खुद को वैध ऑपरेटर दिखाया और वास्तविक मालिकों को भ्रम में रखा।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरी योजना बेहद चालाकी से बनाई गई थी, ताकि निवेशक खुद को सुरक्षित समझें और कानूनी पचड़ों में उलझे रहें। शुरुआती जांच में करीब 500 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान लगाया गया है, जो आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। आरोपी को छह दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है और आर्थिक लेन-देन, शेल कंपनियों और संभावित सहयोगियों की गहन जांच की जा रही है।

यह मामला गुरुग्राम जैसे रियल एस्टेट हब में निवेशकों के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। पुलिस का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसमें भरोसे, कागजों और कानून की जटिलताओं को हथियार बनाया गया। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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