पश्चिम एशिया तनाव के बीच गैस आपूर्ति पर सख्ती, अब सीमित होगी सिलेंडर बुकिंग

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी टकराव के असर अब भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगे हैं। संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू गैस वितरण को संतुलित रखने के लिए नए नियम लागू करने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में Bharat Petroleum Corporation Limited ने उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, ताकि हर घर तक गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब एक उपभोक्ता एक महीने में अधिकतम दो ही एलपीजी सिलेंडर बुक कर सकेगा। यदि कोई इससे अधिक बुकिंग करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे स्वतः रोक देगा और संबंधित उपभोक्ता से पूछताछ भी की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य अनावश्यक स्टॉकिंग और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

सालाना कोटा भी तय किया गया है। सरकार की ओर से हर वित्तीय वर्ष में 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर दिए जाते हैं। इसके अलावा उपभोक्ता जरूरत पड़ने पर 3 अतिरिक्त सिलेंडर बिना सब्सिडी के ले सकते हैं। यानी एक कनेक्शन पर पूरे साल में अधिकतम 15 सिलेंडर ही मिल सकेंगे। इसके साथ ही दो बुकिंग के बीच का अंतराल भी बढ़ा दिया गया है। पहले जहां 21 दिन बाद अगली बुकिंग की जा सकती थी, अब यह अवधि 25 दिन कर दी गई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित किया जा सके।

अगर किसी उपभोक्ता को तय सीमा से अधिक गैस की आवश्यकता होती है, तो अब उसे सीधे अतिरिक्त सिलेंडर नहीं मिलेगा। इसके लिए कंपनी के ‘Hello BPCL’ ऐप के माध्यम से कारण बताना होगा। उपभोक्ता को यह स्पष्ट करना होगा कि अतिरिक्त गैस की जरूरत क्यों है, जैसे घर में कोई कार्यक्रम, शादी या मेहमानों की अधिक संख्या। कंपनी द्वारा समीक्षा के बाद ही अतिरिक्त सिलेंडर की अनुमति दी जाएगी।

सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब सिलेंडर डिलीवरी के समय मोबाइल पर आने वाला ओटीपी (DAC) अनिवार्य कर दिया गया है। डिलीवरी के समय यह ओटीपी बताना जरूरी होगा, अन्यथा सिलेंडर नहीं मिलेगा। इसके अलावा बुकिंग केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही मान्य होगी। यदि उपभोक्ता का नंबर बदल गया है, तो उसे तुरंत अपडेट कराना होगा।

सबसे अहम बदलाव e-KYC को लेकर किया गया है। अब सभी उपभोक्ताओं के लिए e-KYC अनिवार्य कर दी गई है। यदि किसी की केवाईसी अधूरी पाई जाती है, तो उसकी सब्सिडी रोकी जा सकती है और बुकिंग प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

सरकार और गैस कंपनियों का मानना है कि ये कदम अस्थायी जरूर हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बेहद जरूरी हैं। इन उपायों से न केवल गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक समय पर ईंधन पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

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