मनोहर लाल खट्टर का बयान चर्चा में राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा की राजनीति में हलचल,

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हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी बीच कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों को हरियाणा से बाहर शिमला भेजे जाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। इस घटनाक्रम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar का एक बयान कांग्रेस खेमे में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले खट्टर ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी का एक आधिकारिक उम्मीदवार मैदान में है और उसकी जीत पूरी तरह सुनिश्चित है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भाजपा के पास जो अतिरिक्त 17 वोट हैं, उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी Satish Nandal के समर्थन में डाला जा सकता है। खट्टर ने भरोसा जताया कि यदि यह रणनीति लागू होती है तो नांदल की जीत की संभावना भी मजबूत हो सकती है।

हरियाणा की राजनीति में यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक ‘पोचिंग’ को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही हैं। इसी आशंका के चलते कांग्रेस नेतृत्व ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर ले जाकर Shimla में ठहराया है, ताकि मतदान से पहले किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके।

कांग्रेस के इस कदम को राजनीतिक प्रबंधन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय राजनीति में राज्यसभा चुनावों के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां बनती रही हैं, जब दल अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थानों पर रखकर क्रॉस वोटिंग या विपक्षी दलों द्वारा संपर्क साधने की कोशिशों से बचाने का प्रयास करते हैं। हरियाणा में भी मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने एहतियातन यह कदम उठाया है।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए खट्टर ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि विधायकों को शिमला ले जाना उनकी अपनी रणनीति है, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए यह भी कहना मुश्किल है कि वे समय पर वापस लौट पाएंगे या नहीं। खट्टर की यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इसे कांग्रेस की रणनीति पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है।

हरियाणा में राज्यसभा की इस सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं। एक तरफ भाजपा अपने आधिकारिक उम्मीदवार की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही है, वहीं अतिरिक्त वोटों के इस्तेमाल को लेकर भी पार्टी रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ती नजर आ रही है। दूसरी ओर कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने की कोशिश कर रही है ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की अप्रत्याशित स्थिति न बने।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव ने हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच रणनीतिक मुकाबले को उजागर कर दिया है। भाजपा जहां अपने गणित और संभावित समर्थन को लेकर आत्मविश्वास दिखा रही है, वहीं कांग्रेस किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए पूरी सतर्कता बरत रही है।

राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने तक यह सियासी खींचतान जारी रहने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को पूरी तरह एकजुट रख पाएगी या भाजपा की रणनीति चुनावी समीकरणों को नया मोड़ देगी।

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