मोहाली-चंडीगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, सनेटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज

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प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार तड़के मोहाली और चंडीगढ़ में व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान चलाते हुए कथित रियल एस्टेट वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सनेटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े कथित घोटाले और करोड़ों रुपये की निवेश संबंधी शिकायतों के आधार पर की गई।

जानकारी के मुताबिक, ED की टीमों ने मोहाली और चंडीगढ़ में करीब 12 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दायरे में कई बिल्डर कंपनियां और उनसे जुड़े कारोबारी बताए जा रहे हैं। इनमें ABS टाउनशिप, ओल्टस बिल्डर्स और धीर कंस्ट्रक्शंस जैसी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से लोगों से भारी निवेश करवाया गया और बाद में वित्तीय अनियमितताओं तथा CLU लाइसेंस के कथित दुरुपयोग के मामले सामने आए।

सूत्रों के अनुसार, मोहाली के खरड़ स्थित सेक्टर-121 की वेस्टर्न टावर्स सोसाइटी में भी ED की टीम ने कार्रवाई की, जहां आईटी सेक्टर से जुड़े एक कारोबारी के फ्लैट की तलाशी ली गई। बताया जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसी की टीम दिल्ली से पहुंची थी और उसने सुबह तड़के कार्रवाई शुरू की।

इस दौरान घटनास्थल पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब कथित तौर पर एक फ्लैट की नौवीं मंजिल से नकदी से भरा बैग नीचे फेंके जाने की सूचना सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैग जमीन पर गिरने के बाद फट गया और उसमें रखे 500-500 रुपये के नोट आसपास बिखर गए। कुछ नोट हवा में उड़ते दिखाई दिए, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई।

सूत्रों का दावा है कि नीचे पहले से मौजूद एक व्यक्ति बैग को लेकर वहां से निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जांच एजेंसी की टीम ने उसे रोक लिया। बताया जा रहा है कि बैग से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। हालांकि, बरामद रकम को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। इसके बाद ED अधिकारियों ने दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या निवेशकों से जुटाई गई रकम का दुरुपयोग किया गया और क्या परियोजनाओं में नियमों के विपरीत वित्तीय लेनदेन हुए। इसके अलावा GMADA से मिले CLU लाइसेंस के उपयोग और परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।

हालांकि अभी तक ED की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस कार्रवाई को रियल एस्टेट सेक्टर में वित्तीय पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट निवेश से जुड़े मामलों में बढ़ती शिकायतों के बीच इस तरह की जांच एजेंसियों की कार्रवाई निवेशकों का विश्वास बहाल करने में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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