देश के कई शहरों में अब अपराध केवल अपराध नहीं रह गया है, बल्कि वह खुलेआम शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनता दिखाई दे रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपराधियों के भीतर अब कानून का भय लगातार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में, लोगों के सामने, सड़कों पर घेरकर हमला करना और फिर आराम से फरार हो जाना — यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था को खुली चुनौती जैसा प्रतीत होता है। पंजाब में 16 वर्षीय किशोर साहिल की निर्मम हत्या ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों होते जा रहे हैं और समाज का एक हिस्सा इतनी कम उम्र में हिंसा की इस दुनिया तक कैसे पहुंच रहा है।
यह दर्दनाक घटना 21 मई की बताई जा रही है। परिवार के मुताबिक, करनैल सिंह नगर निवासी साहिल अपने मौसी के बेटे पंकज के साथ मोटरसाइकिल पर सब्जी लेने निकला था। यह एक सामान्य शाम थी, जैसा हर मध्यमवर्गीय परिवार में होता है। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद यह सफर मौत में बदल जाएगा।
परिजनों के अनुसार, जैसे ही दोनों युवक फुल्लांवाला स्टेडियम के पास स्थित सेवा केंद्र के नजदीक पहुंचे, वहां पहले से मौजूद कुछ युवकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। हालात को भांपते हुए साहिल ने खुद को बचाने के लिए मोटरसाइकिल से उतरकर भागने का प्रयास किया, लेकिन हमलावरों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को दहला दिया।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने साहिल पर तेजधार हथियारों से लगातार वार किए। उसके सिर और शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें पहुंचाई गईं। हमला इतना क्रूर था कि किशोर सड़क पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि आसपास मौजूद लोग भय और अफरा-तफरी के बीच कुछ समझ नहीं पाए।
गंभीर हालत में साहिल को तुरंत फिरोजपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की। लेकिन गहरे जख्मों के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 16 साल की उम्र में हुई इस हत्या ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। घर में मातम पसरा हुआ है और माता-पिता अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उनका बेटा किस दुश्मनी का शिकार बन गया।
घटना के बाद थाना सदर पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। पुलिस ने तीन दिन की जांच के बाद देव कॉलोनी गली नंबर 6 निवासी परम, गौतम, बच्चू और हैबोवाल निवासी नन्नी समेत 10 से 12 अज्ञात युवकों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
हालांकि, इस घटना ने केवल एक परिवार को शोक में नहीं डाला, बल्कि समाज के सामने कई असहज सवाल भी छोड़ दिए हैं। आखिर इतनी कम उम्र के युवकों के हाथों में हथियार क्यों पहुंच रहे हैं? क्यों छोटी कहासुनी या व्यक्तिगत विवाद सीधे खूनी हिंसा में बदल जाते हैं? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल — क्या अपराधियों को अब कानून का डर नहीं रह गया?
विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार बढ़ती गैंग संस्कृति, सोशल मीडिया पर हिंसा का महिमामंडन, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और कमजोर सामाजिक संवाद युवाओं को खतरनाक रास्तों की ओर धकेल रहे हैं। कई मामलों में अपराध अब व्यक्तिगत गुस्से से ज्यादा ‘दबदबा’ दिखाने का जरिया बनता जा रहा है। यही कारण है कि सार्वजनिक स्थानों पर भी हमलावर बिना डर के वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
साहिल की हत्या केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि उस बदलते सामाजिक माहौल का संकेत भी है जिसमें युवाओं के भीतर संवेदनाएं कम और हिंसा अधिक दिखाई देने लगी है। अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, लेकिन इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि समाज, परिवार और प्रशासन मिलकर इस बढ़ती हिंसक मानसिकता को समझें और रोकने की गंभीर कोशिश करें, क्योंकि अगर सड़कों पर कानून का डर खत्म होने लगे, तो उसका असर केवल एक शहर या एक परिवार तक सीमित नहीं रहता।