सर्दियों और बढ़ते प्रदूषण के बीच सावधानी बेहद जरूरी: दिल्ली-एनसीआर में स्वास्थ्य जोखिम तेजी से बढ़े

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सर्दियों का मौसम अपने पूरे असर के साथ दस्तक दे रहा है, और इसके साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि शहर लगातार दुनिया के सबसे प्रदूषित स्थानों में शुमार हो रहा है। प्रदूषण के कारण हवा मानो एक “गैस चैंबर” में बदल चुकी है, जिससे खासकर अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए हालात अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। ऐसे समय में स्वास्थ्य विशेषज्ञ आम लोगों से लेकर क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक को अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।



विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण का स्तर सुबह के समय सबसे अधिक होता है, इसलिए लोगों को दिन की शुरुआत बड़ी सतर्कता के साथ करने की जरूरत है। बुजुर्गों और सामान्य सेहत वाले लोगों को सुबह-सुबह टहलने से बचने और केवल सूरज निकलने के बाद ही बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है। खाली पेट बाहर निकलना स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है, इसलिए हल्का नाश्ता जैसे चाय-बिस्कुट या बादाम लेने के बाद ही बाहर जाना बेहतर है। ठंड में हृदय पर दबाव बढ़ जाता है, इसलिए स्वयं को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह ढककर रखना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेना भी जरूरी है, क्योंकि ठंड में प्यास कम लगने के बावजूद शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है।

विशेष ध्यान इस बात का भी रखना चाहिए कि सुबह बिस्तर से उठते समय जल्दबाजी न करें। तापमान के अचानक बदलाव से शरीर को झटका लग सकता है, इसलिए धीरे-धीरे उठना और तुरंत गर्म कपड़े पहनना बेहतर तरीका है। सर्दी, खांसी, गले में खराश या बुखार जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बहुत खराब हो, तो बाहर निकलना कम से कम रखें और यदि निकलना पड़े तो N95 मास्क जरूर पहनें। भारी भोजन से दूरी बनाकर हल्का और पौष्टिक भोजन लेना भी मौसमी बीमारियों से रक्षा करता है।

जो लोग पहले से बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए सर्दियों और प्रदूषण का यह संयोजन और भी खतरनाक हो सकता है। उच्च रक्तचाप वाले मरीजों के लिए ठंड विशेष रूप से जोखिमपूर्ण है, क्योंकि ठंड में BP बढ़ने की संभावना रहती है। विशेषज्ञ शाम के समय BP की जांच की सलाह देते हैं और किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने पर जोर देते हैं। रक्तचाप के मरीजों को कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सर्दियों में खून गाढ़ा होने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है और कई बार डॉक्टर इस स्थिति में ब्लड थिनर दवाएं भी लिखते हैं।

हृदय रोगियों के लिए यह मौसम आत्म-नियंत्रण और सतर्कता का समय है। भारी व्यायाम से दूरी रखते हुए सूर्योदय के बाद हल्की सैर करना उनके लिए लाभकारी माना जाता है। दिन में कुछ समय धूप लेना शरीर को गर्माहट और विटामिन D प्रदान करता है। दूसरी ओर मधुमेह के मरीजों को अपने शुगर स्तर पर विशेष नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ठंड में गतिविधि कम होने और मीठा अधिक खाने की वजह से शुगर स्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में नियमित जांच और डॉक्टर से समय पर सलाह लेना अत्यंत जरूरी है।

फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग इस मौसम के सबसे बड़े जोखिम समूह में शामिल हैं। उनके लिए N95 मास्क पहनना अनिवार्य माना जा रहा है, क्योंकि प्रदूषित वातावरण में थोड़ी-सी लापरवाही भी उनकी स्थिति को गंभीर बना सकती है। दवाइयों का समय पर सेवन, नियमित जांच और शुरुआती लक्षणों पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह ही इस मौसम में उनकी सुरक्षा की कुंजी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों और प्रदूषण के इस दोहरे खतरे को देखते हुए हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में सावधानी और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। यह सावधानियाँ न सिर्फ मौसमी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से भी बचाती हैं।

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