सामाजिक न्याय की दिशा में हरियाणा सरकार के कदमों को रेखांकित करते कृष्ण बेदी, बोले—वंचितों के अधिकार और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता

Date:

Share post:

हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा है कि अनुसूचित जाति समाज के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान को राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि वंचित परिवारों को सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का आधार देना है।

चंडीगढ़ के लेक क्लब में अनुसूचित जाति समाज से जुड़े नवनियुक्त चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और अन्य पदाधिकारियों के सम्मान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए बेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार सामाजिक न्याय को योजनाओं और नीतियों के माध्यम से जमीन पर उतारने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति समाज के अधिकारों की रक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

बेदी ने कहा कि अनुसूचित जाति समाज का इतिहास संघर्ष, स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक सुधारों और आधुनिक भारत के निर्माण तक समाज के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुसार, वास्तविक सामाजिक विकास तभी संभव है जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी शिक्षा, रोजगार, आवास और सम्मानजनक जीवन के अवसरों से जुड़ सके।

मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वंचित वर्ग का युवा आत्मनिर्भर बने, बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिले तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सम्मान के साथ जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।

अपने संबोधन में बेदी ने आरक्षण से जुड़े सरकार के फैसले को भी सामाजिक न्याय के व्यापक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनुसूचित जाति समाज के भीतर कुछ ऐसे वर्गों की चिंता सामने आती रही है, जिन्हें आरक्षण का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। उनके अनुसार, इस असमानता को दूर करना सरकार के लिए सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण चुनौती थी।

उन्होंने बताया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के संकल्प-पत्र में अनुसूचित जातियों के आरक्षण में वंचित वर्गों के लिए अलग हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का वादा किया गया था। सरकार ने इस दिशा में निर्णय लेते हुए सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित 20 प्रतिशत आरक्षण में से 10 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से वंचित अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित किया है। बेदी ने इसे सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम बताया।

मंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का एक महत्वपूर्ण पक्ष आवास और भूमि से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना भी है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की घोषणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि केवल प्लॉट आवंटित करने की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र परिवारों को वास्तविक रूप से जमीन का अधिकार और उस पर आवास की सुविधा मिलनी चाहिए।

बेदी के अनुसार, वर्तमान सरकार ने ऐसे परिवारों को जमीन के दस्तावेज और कब्जे उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया है, जो पहले इन सुविधाओं से वंचित रह गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जरूरतमंद परिवारों के पास अपना घर हो और उन्हें बुनियादी सुरक्षा का एहसास मिले।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने लगभग 16,500 जरूरतमंद परिवारों को अलग से 100-100 वर्ग गज के प्लॉट उपलब्ध कराए हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को इन भूखंडों पर मकान बनाने में सहायता दी गई है। सरकार के अनुसार, पिछले साढ़े 11 वर्षों में करीब 1.60 लाख पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं। जिन परिवारों के पास जमीन या प्लॉट नहीं थे, उनके लिए फ्लैट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बेदी ने मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए इस योजना के तहत 71 हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उनके अनुसार, अब तक करीब 2.60 लाख बेटियों के विवाह के अवसर पर सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है।

स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर मंत्री ने आयुष्मान भारत-चिरायु योजना के आंकड़े भी साझा किए। सरकार के अनुसार, योजना के तहत अब तक 29 लाख 20 हजार 806 मरीजों का लगभग 4,131 करोड़ रुपये का उपचार निःशुल्क किया गया है। सरकार इसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खर्च का बोझ कम करने वाली प्रमुख पहल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

बेदी ने अपने संबोधन में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समान अधिकार, समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन की संवैधानिक व्यवस्था ने वंचित वर्गों को आगे बढ़ने का मजबूत आधार दिया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर के शिक्षा, संगठन और संघर्ष के संदेश को आज भी सामाजिक प्रगति के लिए प्रासंगिक बताया।

उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का अंतिम उद्देश्य केवल आंकड़े तैयार करना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, जब गरीब परिवारों को आवास मिलता है, बेटियों की शिक्षा और विवाह में सहायता मिलती है तथा जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता है, तो इससे सामाजिक सुरक्षा की व्यापक भावना मजबूत होती है।

कार्यक्रम में नवनियुक्त पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया। हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग की चेयरमैन बंतो कटारिया, वाइस चेयरमैन रेणू डाबला, घुमंतू जाति से संबंधित चेयरमैन जसमेर बंजारा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अजय खुंडिया, सुनीता दुग्गल, रविंद्र बलियाना, संयोजक प्रो. जयनारायण और ओपी चोपड़ा सहित अनेक पदाधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

समारोह का राजनीतिक और सामाजिक महत्व भी रहा। एक ओर सरकार ने अनुसूचित जाति समाज से जुड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों और उपलब्धियों को सामने रखा, वहीं मंत्री कृष्ण बेदी ने सामाजिक न्याय को केवल सरकारी सहायता तक सीमित न रखने का संदेश दिया। उनके वक्तव्य का केंद्रीय बिंदु यही रहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तब है जब समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी अधिकार, अवसर, आवास, स्वास्थ्य और सम्मान की समान पहुंच हासिल हो।

हरियाणा सरकार के सामने अब इन योजनाओं के लाभ को अंतिम पात्र व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की चुनौती है। योजनाओं की संख्या और वित्तीय प्रावधानों के साथ-साथ उनका पारदर्शी क्रियान्वयन, पात्रता की सही पहचान और जमीनी स्तर पर निगरानी ही यह तय करेगी कि सामाजिक न्याय के दावे कितने व्यापक सामाजिक बदलाव में बदलते हैं। समारोह में दिए गए संदेश से स्पष्ट है कि सरकार अनुसूचित जाति समाज के कल्याण को अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Related articles

भारत के स्वच्छ ऊर्जा अभियान को नई गति: एसजेवीएन ने बिहार में 75 मेगावाट जमुई सौर परियोजना शुरू की : भूपेंद्र गुप्ता

शिमला, 12 अगस्त 2026। भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज...

Himachal Steps Up Support for Fishermen as Sukhu Government Expands Rural Livelihood Push

Bilaspur — The Himachal Pradesh government has announced a fresh package of financial and institutional support for the...

Haryana Politics at a Turning Point: Saini’s Development Push, Youth Expectations and the Opposition Challenge

Haryana’s political conversation is increasingly moving beyond traditional electoral equations, with the Nayab Singh Saini government facing questions...