हरियाणा में बढ़ी सर्दी, 7 जिलों में शीतलहर की चेतावनी — आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट जारी रहने की संभावना

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हरियाणा के कई जिलों में ठंड ने अगले 24 घंटे में तेज़ रफ्तार पकड़ने के संकेत दिए हैं। मौसम विभाग ने सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल में शीतलहर (कोल्ड वेव) का अलर्ट जारी किया है। बढ़ती ठंड के बीच राज्य का न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है। हालाँकि राज्य के कुछ हिस्सों में दिन के समय तापमान सामान्य रहा — दोपहर में पलवल में अधिकतम तापमान 27.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।  वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें, तो मानसून के पहले औसत से करीब 1.9 डिग्री कम है।

अगले दिनों का मौसम — ठंड जारी रहेगी

मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार,

  • आज (3 दिसंबर) को हवाओं की रफ्तार बढ़ने से अधिकतम तापमान 23°C और न्यूनतम 5–9°C तक रहने की उम्मीद है।
  • 4 दिसंबर को ठंड और चरम स्तर तक बढ़ेगी — अधिकतम 20°C, न्यूनतम 4–8°C।
  • 5 दिसंबर को हल्के बादल और धुंध के साथ दिन 22°C व रात 7°C तक रह सकती है।
  • 6 व 7 दिसंबर को मौसम सुस्त रहेगा, दिन 24°C तक तापमान और रात 6–8°C तक रहने की संभावना। पर 9 दिसंबर से फिर धुंध व हवा की गति तेज होने से तापमान में गिरावट हो सकती है।

विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलते रात के समय ठंड और बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों में सुबह पाला गिरने की संभावना है, वहीं शहरी क्षेत्रों में कोहरे के कारण दृश्यता कम हो सकती है।

क्या है शीतलहर की परिभाषा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मैदानी इलाकों में यदि न्यूनतम तापमान 10°C के नीचे गिर जाए और वह सामान्य से 4.5 °C या अधिक नीचे हो, तो कोल्ड वेव की स्थिति बनती है। पहाड़ी इलाकों के लिए यह सीमा 0°C या उससे कम होती है। इस अलर्ट का मकसद जनता को ठंड तथा उससे जुड़े स्वास्थ्य व यात्रा जोखिमों से पहले सावधान करना होता है।

नागरिकों और किसानों को सुझाव

  • सुबह-सुबह व रात को खासकर अलाव, गर्म कपड़ों व पर्याप्त गर्म पेय का सेवन करें।
  • बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हृदय/स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को ठंड में बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
  • सड़कों पर पाले व ब्लैक आइस के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है — वाहन चलाते समय धीमी रफ्तार रखें।
  • धुंध व कोहरे के समय इंतजार से निकलें और दृश्यता कम होने पर हैडलाइट्स व सावधानी का उपयोग करें।
  • किसानों को सुझाव दिया गया है कि रात के समय फसलों व बूढ़े पेड़ों की रक्षा के लिए धूप निकलने तक पानी देना व हल्की सिंचाई करें।

हरियाणावासियों से अपील है कि इस ठंडी लहर के दौरान अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। मौसम का यह दौर अस्थायी है, लेकिन सावधानी हमें सुरक्षित रख सकती है।


हालाँकि राज्य के कुछ हिस्सों में दिन के समय तापमान सामान्य रहा — दोपहर में पलवल में अधिकतम तापमान 27.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।  वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें, तो मानसून के पहले औसत से करीब 1.9 डिग्री कम है।

अगले दिनों का मौसम — ठंड जारी रहेगी

मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार,

* आज (3 दिसंबर) को हवाओं की रफ्तार बढ़ने से अधिकतम तापमान 23°C और न्यूनतम 5–9°C तक रहने की उम्मीद है।
* 4 दिसंबर को ठंड और चरम स्तर तक बढ़ेगी — अधिकतम 20°C, न्यूनतम 4–8°C।
* 5 दिसंबर को हल्के बादल और धुंध के साथ दिन 22°C व रात 7°C तक रह सकती है।
* 6 व 7 दिसंबर को मौसम सुस्त रहेगा, दिन 24°C तक तापमान और रात 6–8°C तक रहने की संभावना। पर 9 दिसंबर से फिर धुंध व हवा की गति तेज होने से तापमान में गिरावट हो सकती है।

विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलते रात के समय ठंड और बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों में सुबह पाला गिरने की संभावना है, वहीं शहरी क्षेत्रों में कोहरे के कारण दृश्यता कम हो सकती है।

क्या है शीतलहर की परिभाषा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मैदानी इलाकों में यदि न्यूनतम तापमान 10°C के नीचे गिर जाए और वह सामान्य से 4.5 °C या अधिक नीचे हो, तो कोल्ड वेव की स्थिति बनती है। पहाड़ी इलाकों के लिए यह सीमा 0°C या उससे कम होती है। इस अलर्ट का मकसद जनता को ठंड तथा उससे जुड़े स्वास्थ्य व यात्रा जोखिमों से पहले सावधान करना होता है।

नागरिकों और किसानों को सुझाव

* सुबह-सुबह व रात को खासकर अलाव, गर्म कपड़ों व पर्याप्त गर्म पेय का सेवन करें।
* बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हृदय/स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को ठंड में बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
* सड़कों पर पाले व ब्लैक आइस के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है — वाहन चलाते समय धीमी रफ्तार रखें।
* धुंध व कोहरे के समय इंतजार से निकलें और दृश्यता कम होने पर हैडलाइट्स व सावधानी का उपयोग करें।
* किसानों को सुझाव दिया गया है कि रात के समय फसलों व बूढ़े पेड़ों की रक्षा के लिए धूप निकलने तक पानी देना व हल्की सिंचाई करें।

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