चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन/एसीपीएल को कनिष्ठ कर्मचारियों के बराबर स्टेपिंग-अप किए जाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, वित्तीय शक्तियों के पुनः प्रत्यायोजन (री-डेलीगेशन) से संबंधित पीएफआर वॉल्यूम–1 के नियम 19.1 के तहत नोट 5 की स्थिति को भी स्पष्ट कर दिया गया है।
मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इस विषय पर दो अलग-अलग पत्र जारी किए गए, जिनमें विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं।
**स्टेपिंग-अप केवल पात्रता के आधार पर, व्यक्तिगत लाभ पर नहीं मिलेगा समायोजन**
वित्त विभाग ने साफ किया है कि 20 दिसंबर 2024 के आदेशों के अनुसार वरिष्ठ कर्मचारी का वेतन या एसीपीएल तभी कनिष्ठ कर्मचारी के बराबर स्टेपिंग-अप किया जा सकता है, जब वह एचसीएस (एसीपी) नियम, 2016 के तहत एसीपी के लिए पात्र हों। यदि किसी कनिष्ठ कर्मचारी को व्यक्तिगत कारणों से अधिक वेतन प्राप्त हो रहा है, तो उस स्थिति में स्टेपिंग-अप लागू नहीं होगा।
सरकार ने यह भी पाया है कि कई विभाग ऐसे मामलों की जांच अपने स्तर पर करने के बजाय सीधे वित्त विभाग को भेज रहे हैं। ऐसे में निर्देश दिए गए हैं कि विभाग पहले स्वयं जांच करें और केवल वे मामले ही वित्त विभाग को भेजें जो निर्धारित आदेशों के दायरे में नहीं आते और जिनकी आगे स्पष्टता आवश्यक है।
**वित्तीय शक्तियों के पुनः प्रत्यायोजन पर सख्त नियम लागू**
सरकार ने पीएफआर वॉल्यूम–1 के नियम 19.1 के नीचे दिए गए नोट 5 के संबंध में भी कड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। हाल में यह सामने आया कि कुछ विभागाध्यक्ष अपनी वित्तीय शक्तियां फील्ड अधिकारियों को सौंप रहे थे, जो नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
नए निर्देशों के अनुसार—
* प्रशासनिक विभाग केवल अपने विभाग में कार्यरत राजपत्रित अधिकारियों—जैसे सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव अथवा एसएएस कैडर अधिकारियों—को ही वित्तीय शक्तियां सौंप सकते हैं।
* विभागाध्यक्ष केवल अपने कार्यालय के राजपत्रित अधिकारियों—जैसे अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक आदि—को ही ये शक्तियां सौंपने के लिए अधिकृत हैं।
* कोई प्रशासकीय सचिव अपनी वित्तीय शक्तियां विभागाध्यक्ष को नहीं दे सकता।
* विभागाध्यक्ष किसी भी परिस्थिति में अपनी वित्तीय शक्तियां फील्ड अधिकारियों या कार्यालय प्रमुखों को नहीं सौंप सकते।
सरकार के इन नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता, अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि विभागों में नियमों के विपरीत हो रही प्रक्रियाओं पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।


