हिमाचल प्रदेश में जारी रही मूसलाधार बारिश, प्रदेशभर में संकट

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हिमाचल प्रदेश, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वादियों के लिए देशभर में विख्यात है, इस वर्ष के मानसून में अब तक अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदाओं से दो-चार हो रहा है। 28 जुलाई 2025 को भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। जहां एक ओर राहत कार्यों में प्रशासन पूरी तत्परता से जुटा है, वहीं मौसम विभाग के लगातार जारी अलर्ट ने लोगों की चिंता को और भी गहरा दिया है।

लगातार बारिश ने बिगाड़े हालात

प्रदेश के लगभग सभी जिलों में आज सुबह से ही तेज़ बारिश का सिलसिला जारी है, और कहीं-कहीं तो रात भर ही मूसलाधार वर्षा होती रही। इस बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के लोगों को न केवल बाढ़, जलभराव और सड़क दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ा, बल्कि अत्यधिक भूस्खलनों के चलते सैकड़ों सड़कों और कई गांवों का बाहर की दुनिया से संपर्क कट गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आज एक बार फिर ताजा चेतावनी जारी करते हुए प्रदेश के 10 जिलों— शिमला, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, चंबा, सिरमौर, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना— के लिए येलो अलर्ट घोषित किया है। वहीं, 29 जुलाई के लिए शिमला, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जिस कारण अगले 24 घंटे और कठिन साबित हो सकते हैं। प्रदेश में लगातार गिर रही बारिश ने जलस्तर को बढ़ा दिया है, कई नदियां उफान पर हैं और रिहायशी इलाकों में पानी घुस जाने के समाचार भी मिल रहे हैं।

सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं पर भारी असर

राज्य की सड़क सेवाएं मानसून की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 197 सड़कें आज भी बंद रहीं, जिसमें दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। सड़कों का बंद होना ना सिर्फ सामान्य नागरिकों की दिक्कतें बढ़ाता है, बल्कि राहत और बचाव कार्य में लगे दलों के लिए पहुँचना भी चुनौतीपूर्ण बना देता है। कई जगह एम्बुलेंस और राहत सामग्री पहुंचाने में देरी हो रही है, जिससे प्रभावित इलाकों में चिंता बढ़ गई है।

जबरदस्त वर्षा का असर न केवल सड़कों तक सीमित है, बल्कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी सेवाओं पर भी पड़ा है। बिजली के करीब 75 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे हजारों घरों में अंधेरा पसरा है। वहीं, 97 से अधिक पेयजल योजनाएं भी खराब मौसम के कारण ठप्प पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की किल्लत गहरा गई है। इन संकटों के बीच, प्रशासन और स्थानीय पंचायती राज संस्थाओं द्वारा पीड़ितों को वैकल्पिक उपायों से राहत पहुंचाने की कोशिश जारी है।

प्राकृतिक आपदा का बढ़ता कहर – जानमाल की भारी क्षति

मानसून के इस भयावह सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश में इंसानी जान की भारी क्षति हुई है। 20 जून से 28 जुलाई के बीच प्राकृतिक आपदाओं— जिसमें भूस्खलन, बाढ़, फ्लैश फ्लड और बिजली गिरने जैसी घटनाएं शामिल हैं— में 161 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस कालखण्ड में 263 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से कई अस्पतालों में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे ज्यादा असर मंडी जिले में देखा गया है, जहां अकेले 32 लोगों की मौत और 27 के लापता होने की खबर है।

कुल्लू, कांगड़ा, चंबा, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में भी लगातार बारिश व भूस्खलन से कई इलाकों में जन-धन की हानि हुई है; कई परिवार उजड़ गए हैं और लोगों की जीवन भर की कमाई, घर, व्यवसाय सबकुछ मलबे में दफन हो गया है। अब तक राज्यभर से 35 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनकी तलाश और बचाव अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बोल्डरों, मलबे व नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के कारण राहत-बचाव कार्य भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

प्रशासन और सरकार की चुनौतियां व प्रयास

राज्य सरकार और प्रशासन इन त्रासद परिस्थितियों से निपटने में पूरी तरह से जुटा हुआ है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की कई टीमें प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हालात की समीक्षा करते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में कोई कोताही न बरती जाए, प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए तथा चिकित्सा-खाद्य-पानी की व्यवस्था तत्काल की जाए।

इसी के साथ केन्द्र सरकार से भी विशेष सहायता राशि जारी कराई गई है और विधायक निधि से आपदा पीड़ितों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। राहत शिविरों में सैकड़ों लोग अभी भी शरण लिए हुए हैं, तो कई गांवों में भोजन-पानी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।

सतर्कता और भविष्य की रणनीति

बारिश का दौर थमता नहीं दिख रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक मौसम में कोई बड़ा सुधार नहीं आने वाला, जिससे खतरा लगातार बना रहेगा। प्रदेशभर में प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जर्जर मकानों के आसपास न जाएं। यात्रियों और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि अनावश्यक सफर से बचें और मौसम एवं प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

एकजुटता और संवेदना

हिमाचल की वादियों में इस समय सिर्फ राहत व बचाव की ही गूंज है। प्रदेशवासियों में जहां संकट है, वहीं आपसी सहयोग और मानवता का भी अप्रतिम उदाहरण देखने को मिल रहा है। आशा है कि प्रशासन, सरकार और आम नागरिकों के संकल्प के साथ हिमाचल शीघ्र ही इस मुश्किल घड़ी से बाहर निकल सकेगा। संकट और चेतावनी के इस दौर में प्रदेश, देश और दुनियाभर के लोगों से दुआओं और मदद की जरूरत है— ताकि देवभूमि हिमाचल फिर से मुस्कुरा सके।

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