हिमाचल में प्रकृति का कहर थमा नहीं, भूस्खलन, बादल फटने और सड़कों के बंद होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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हिमाचल प्रदेश इन दिनों प्रकृति के कहर का सबसे भयावह दौर झेल रहा है। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक लगातार बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने न सिर्फ जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर असर डाला है। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे एक बार फिर पंडोह डैम के समीप भारी भूस्खलन के कारण पूरी तरह बंद हो गया है। शनिवार सुबह करीब साढ़े चार बजे भारी बारिश के चलते पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें सड़क पर आ गिरीं, जिससे यह व्यस्त मार्ग अवरुद्ध हो गया और दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए। इनमें बड़ी संख्या में पर्यटक हैं जो मनाली की ओर जा रहे थे या वहां से लौट रहे थे। इन फंसे हुए लोगों के लिए यह अनुभव बेहद परेशानी भरा बन गया।

स्थानीय प्रशासन की मशीनरी सुबह 9 बजे के बाद ही मौके पर पहुंच सकी, जिसके बाद मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। लेकिन भारी चट्टानों को हटाने में काफी समय लग रहा है और सड़क बहाली की कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी जा सकी है। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे वैकल्पिक मार्ग अपनाएं और जब तक स्थिति सामान्य न हो, तब तक यात्रा स्थगित रखें।

इसी बीच, जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति भी प्राकृतिक आपदाओं से अछूता नहीं रहा। शुक्रवार को यहां तिंदी के समीप जंगल कैंप, यांगला और जिस्पा क्षेत्र में एक साथ तीन जगह बादल फटने की घटनाएं सामने आईं। जिससे इन इलाकों में अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए। जिस्पा के मरशेन नाला में बादल फटने से सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मनाली-लेह मार्ग घंटों तक बंद रहा। कई पर्यटक अस्थायी कैंपों में शरण लेने को मजबूर हो गए। अटल टनल रोहतांग के समीप धुंधी में भी भारी भूस्खलन से रास्ता बंद हो गया, खासकर बड़े वाहनों के लिए। यहां लगभग तीन दिनों से 300 से अधिक ट्रक फंसे हैं, जो लेह-लद्दाख के लिए जरूरी सामान लेकर जा रहे थे।

इस आपदा के बीच एक राहत भरी खबर यह रही कि जम्मू-कश्मीर बीएसएनएल का एक वाहन, जो नेटवर्क संबंधी कार्यों के लिए आया था, समय रहते उसमें सवार लोग सुरक्षित निकलने में सफल रहे। शुक्रवार को रोहतांग दर्रा और लाहौल घाटी की ऊँचाई वाली चोटियों पर हल्की बर्फबारी भी दर्ज की गई। राजधानी शिमला में लगातार बारिश होती रही और पूरे प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री नीचे दर्ज किया गया।

बारिश का प्रभाव इतना व्यापक है कि प्रदेश की 283 सड़कें, 314 बिजली ट्रांसफार्मर और 221 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। मंडी-कुल्लू और भरमौर-पठानकोट जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवागमन बाधित रहा। चंबा जिले में भारी बारिश के चलते एक एंबुलेंस कर्मी और एक छात्रा को चोटें आईं। गगल और शिमला से कोई भी हवाई उड़ान संचालित नहीं हो सकी। शाहपुर क्षेत्र में एक मकान ढह गया जबकि एक गोशाला गिरने से एक गाय और 12 बकरियों की मौत हो गई। ऊहल नदी के उफान पर आने से बस्सी और शानन परियोजनाओं में बिजली उत्पादन ठप हो गया। रामपुर-रोहड़ू मार्ग भी भूस्खलन के कारण बंद हो गया और एनएच-5 पागल नाले के पास सवा घंटे तक बाधित रहा।

भरमौर-पठानकोट हाईवे पर केरू और लूणा में लगातार पत्थर गिरने से रास्ता बार-बार बाधित हो रहा है। चंबा के रठियार पंचायत के रखेला गांव में एक छात्रा के सिर पर पत्थर गिरने से वह घायल हो गई। चुवाड़ी-लाहडू सड़क धंसने के कारण भटियात क्षेत्र का कांगड़ा से संपर्क पूरी तरह कट गया है। भूलहण गांव में नेहरा पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने से 50 परिवार खतरे में हैं, जिन्हें स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंडी जिले के पंडोह डैम क्षेत्र और बगलामुखी रोपवे के पास शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे हाईवे पूरी तरह से ठप हो गया। शाम 5 बजे के करीब इसे अस्थाई रूप से बहाल किया गया। नौ मील क्षेत्र में एनएच पर मलबा जमा होने से दलदल की स्थिति बनी रही। वहीं रामपुर-रोहड़ू मार्ग पर भी रात को भारी भूस्खलन से चार से पांच पेड़ और चट्टानें गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध रहा। सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने से रामपुर-नित्थर सड़क भी जलमग्न हो गई।

बंजार उपमंडल के घलियाड़ गांव के पीछे हुए भूस्खलन के कारण गांव को खतरा उत्पन्न हो गया, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन 10 मकानों को खाली करवा कर 49 लोगों को सुरक्षित टेंटों में ठहराया है। बिलासपुर जिले में भी गुरुवार रात से लगातार बारिश का कहर जारी है। शुक्रवार सुबह सात बजे किरतपुर-मनाली फोरलेन पर समलेटू के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिससे यह मार्ग बंद हो गया। पुराने एनएच से ट्रैफिक डायवर्ट किया गया और चार घंटे बाद हाईवे को एक तरफ से खोला जा सका।

इस साल जुलाई में हिमाचल में 250.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जो वर्ष 1901 के बाद 73वीं सबसे अधिक बारिश है। हालांकि यह सामान्य 255.9 मिमी से करीब 2 फीसदी कम है। मंडी में सबसे अधिक 574.7 मिमी और लाहौल-स्पीति में सबसे कम 32.2 मिमी वर्षा दर्ज हुई। कई जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई, जिनमें बिलासपुर, हमीरपुर, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और ऊना शामिल हैं, जबकि चंबा, कांगड़ा, सोलन और लाहौल-स्पीति में सामान्य से कम वर्षा हुई है।

मौसम विभाग ने शनिवार और रविवार को प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। चार और पांच अगस्त को भी हल्की बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) में भी सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और आमजन के लिए चुनौती भरे दिन अभी खत्म नहीं हुए हैं।

यह एक ऑटो वेब-जनरेटेड समाचार वेब स्टोरी है।

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