मैदानी इलाकों में बरसी कुदरत की कहर, ऊना में बाढ़ जैसे हालात, स्कूल-कॉलेज बंद, सड़कें जलमग्न

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हिमाचल प्रदेश एक बार फिर प्रकृति की विनाशकारी मार झेल रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में पहले ही भयंकर बारिश और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त था और अब राज्य के मैदानी इलाके भी इस कहर की चपेट में आ गए हैं। ऊना जिले में शनिवार सुबह से मूसलधार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जो दोपहर तक विकराल रूप धारण कर गया। लगातार हो रही भारी बारिश ने ऊना शहर सहित कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है और आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।

चंडीगढ़-धर्मशाला हाईवे पर जलभराव की स्थिति इतनी भयावह हो गई कि सड़कों पर नदी जैसा बहाव नजर आया। लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऊना के प्रमुख इलाकों में पानी घरों और दुकानों में घुस गया, जिससे लोगों का सामान बहने लगा और लोग अपने घरों से पानी निकालने के लिए जद्दोजहद करते दिखाई दिए। ऊना की चंद्रलोक कॉलोनी में खड्ड का पानी पुल के ऊपर से बहता देखा गया, जिससे साफ जाहिर होता है कि नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।

हालात को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने जिले के सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। डीसी ने अपने आदेश में कहा कि पिछले 12 घंटों से हो रही मूसलधार बारिश के कारण जिले के विभिन्न हिस्सों में जलभराव और सड़क अवरुद्ध हो गई है। ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को बंद करना अत्यावश्यक हो गया है।

वहीं, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने राहत और बचाव कार्यों को तुरंत गति देने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से हालात पर लगातार नजर बनाए रखने और प्रभावित क्षेत्रों में हरसंभव सहायता पहुंचाने को कहा है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों के लिए टीमों को सक्रिय किया गया है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

खेलों के लिए प्रसिद्ध ऊना का इंदिरा मैदान स्थित खेल छात्रावास भी जलमग्न हो गया है। यहां के मैदान और परिसर पानी से भर गए हैं जिससे खिलाड़ियों और कर्मियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। आबादी बराना क्षेत्र में सड़कें पानी में डूबी नजर आईं और कई मोहल्लों में स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर जलनिकासी के प्रयास किए।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन हर जरूरी कदम उठा रहा है। एनडीआरएफ और स्थानीय राहत दलों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा लोगों से अपील की गई है कि वे नदियों व खड्डों के नजदीक न जाएं और अफवाहों से बचें।

हिमाचल के लिए यह समय फिर से चेतावनी की तरह आया है कि प्रकृति से संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। जहां पहाड़ों की ढलानों पर भूस्खलन और भरी बारिश से तबाही हो रही थी, वहीं अब मैदानी क्षेत्र भी जलसंकट और बाढ़ जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ऊना जैसे क्षेत्रों में जिस तरह से पुलों के ऊपर से खड्ड का पानी बहता देखा गया, वह प्रशासन और लोगों के लिए गंभीर संकेत हैं कि अब शहरों और कस्बों में भी आपदा प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हो गई है।

इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब सिर्फ पहाड़ियों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि मैदानों में भी उसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होगी या और बिगड़ेगी, यह मौसम और प्रशासन की तैयारियों पर निर्भर करेगा, लेकिन वर्तमान में ऊना जिला एक गंभीर प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है और प्रदेश सरकार, प्रशासन व जनता सभी इससे पार पाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

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