47 डिग्री की मार के बीच मॉनसून का इंतजार, उत्तर भारत में गर्मी ने तोड़े कई रिकॉर्ड

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उत्तर भारत में मॉनसून की दस्तक को लेकर उम्मीदें तेज होती जा रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस वर्ष सामान्य से पहले आगे बढ़ रहा है और अनुमान है कि 22 जून के आसपास यह उत्तर भारत में प्रवेश कर सकता है। हालांकि उससे पहले पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जबकि राहत फिलहाल केवल हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित रहने की संभावना है, जहां पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हल्की बारिश और ठंडी हवाओं का असर दिखाई देगा।

मौसम विभाग, चंडीगढ़ के निदेशक डॉ. सुरेंद्र पाल के अनुसार अगले दो दिनों में पंजाब से सटे हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में मौसम बदल सकता है। स्थानीय मौसमी गतिविधियों और पश्चिमी विक्षोभ के कारण वहां हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में फिलहाल भीषण गर्मी का दौर जारी रहने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई के अंत तक गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाती रहेंगी।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम विभाग ने ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में अगले तीन दिनों तक गंभीर गर्मी की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत में फिलहाल सूखी और गर्म पश्चिमी हवाएं सक्रिय हैं, जिससे तापमान लगातार सामान्य से ऊपर बना हुआ है।

पंजाब और हरियाणा में हालात सबसे अधिक चिंताजनक बने हुए हैं। बठिंडा, फरीदकोट, रोहतक और हिसार जैसे इलाकों में तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। खेतों, निर्माण स्थलों और खुले में काम करने वाले मजदूरों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी ने जनजीवन के साथ-साथ बिजली और पानी की मांग भी बढ़ा दी है।

इस बार की गर्मी पुराने रिकॉर्ड को चुनौती देती दिखाई दे रही है। पंजाब में बठिंडा का मई 1984 में दर्ज 48.5 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड चर्चा में है, जबकि हरियाणा के हिसार का 19 जून 1981 का 48.4 डिग्री सेल्सियस तापमान अब भी राज्य का सर्वाधिक रिकॉर्ड माना जाता है। मौजूदा मौसम में रोहतक का तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो इस सीजन के सबसे गर्म आंकड़ों में शामिल है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल उत्तर भारत को व्यापक राहत मिलने की संभावना कम है। हालांकि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हल्की बारिश जारी रह सकती है, लेकिन इसका असर मैदानी राज्यों में बहुत ज्यादा नहीं दिखाई देगा। विशेषज्ञों के अनुसार असली राहत मॉनसून के सक्रिय होने के बाद ही मिलेगी।

भारतीय मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इस वर्ष मॉनसून केरल तट पर 26 मई के आसपास पहुंच सकता है, जो सामान्य तिथि से पहले माना जा रहा है। यदि इसकी रफ्तार इसी तरह बनी रहती है तो जून के तीसरे सप्ताह तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी मॉनसून पहुंच सकता है। फिलहाल उत्तर भारत के करोड़ों लोग तपती गर्मी के बीच आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

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