हिसार: हरियाणा के हिसार जिला अदालत परिसर में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पेशी के लिए पहुंचे गैंगस्टर विनोद पानू उर्फ काना पर कोर्ट के मुख्य द्वार के पास गोलीबारी कर दी गई। हमले में विनोद पानू की मौत हो गई, जबकि गोली लगने से दो अन्य लोगों के घायल होने की सूचना है। पुलिस ने वारदात के सिलसिले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार घटना गुरुवार दोपहर करीब 2:50 बजे अदालत परिसर के पार्किंग क्षेत्र में हुई। विनोद पानू एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में अदालत पहुंचा था। इसी दौरान बाइक पर आए हमलावरों ने उसे निशाना बनाकर गोलियां चला दीं। शुरुआती जानकारी में करीब 14 राउंड फायरिंग की बात सामने आई है। घटनास्थल से कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
फायरिंग की आवाज सुनते ही कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों, पक्षकारों और अन्य लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। अदालत जैसी सुरक्षा-संवेदनशील जगह पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और इलाके की घेराबंदी कर दी गई। पुलिस ने हमलावरों की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में नाकाबंदी की। जांच अधिकारियों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और गोलीबारी में इस्तेमाल हथियारों तथा हमलावरों की गतिविधियों से जुड़े सुरागों की तलाश शुरू की।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक विनोद पानू के खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। अलग-अलग रिपोर्टों में उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या 31 से लेकर करीब 40 तक बताई गई है। पुलिस ने अभी इस हमले के पीछे की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। जांच का एक प्रमुख पहलू संभावित गैंगवार और आपसी आपराधिक रंजिश भी है।
हमले के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित पोस्ट भी सामने आई है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने से पहले इस दावे को हमले की आधिकारिक वजह या जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता।
इस घटना ने एक बार फिर अदालत परिसरों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। अदालतें ऐसे स्थान हैं जहां आरोपियों, वकीलों, पुलिसकर्मियों, गवाहों और आम लोगों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे परिसर में हथियारबंद हमलावरों का पहुंचना और गोलीबारी कर भागने की कोशिश करना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती को सामने लाता है।
यह भी जांच का विषय होगा कि हमलावरों को विनोद पानू के अदालत पहुंचने की जानकारी कैसे मिली और वे किस तरह पहले से मौके पर मौजूद थे। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले में कितने लोग शामिल थे, उनका आपस में क्या संबंध था और वारदात के बाद उन्होंने किस रास्ते से भागने का प्रयास किया।
घटना के बाद अदालत परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने मौके से मिले सबूतों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम को दोबारा तैयार करने की कोशिश शुरू कर दी है।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती हमले के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाना है। एक संदिग्ध की गिरफ्तारी जांच में शुरुआती सफलता मानी जा सकती है, लेकिन वारदात में शामिल अन्य लोगों और कथित साजिशकर्ताओं तक पहुंचना जांच की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
हिसार की इस घटना ने हरियाणा में संगठित अपराध और गैंगवार को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इस बार निशाना बनाया गया व्यक्ति अदालत में कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए पहुंचा था और हमला अदालत परिसर के बेहद करीब हुआ।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हत्या के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी, गैंगों के बीच संघर्ष या कोई अन्य आपराधिक कारण था। फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी रखी है और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

