कुरुक्षेत्र में कांग्रेस संगठन को धार देने पहुंचे राहुल गांधी, जिला अध्यक्षों को गांव-गांव सक्रिय होने का दिया संदेश

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कांग्रेस नेता Rahul Gandhi बुधवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित कांग्रेस जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करने पहुंचे, जहां उन्होंने संगठनात्मक मजबूती और जमीनी स्तर पर सक्रियता को लेकर स्पष्ट और आक्रामक संदेश दिया। हरियाणा और उत्तराखंड के जिला कांग्रेस अध्यक्षों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी को गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे जुड़ना होगा और जनआंदोलन के रूप में संगठन को फिर से खड़ा करना होगा।

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे इतिहास में मुगलों और अंग्रेजों का शासन समाप्त हुआ, उसी तरह एक दिन भाजपा का दौर भी खत्म होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे डर या दबाव में आए बिना जनता के बीच जाएं, लोगों की समस्याएं सुनें और कांग्रेस की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाएं। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं में जोश भरने और आक्रामक राजनीतिक लाइन तय करने के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल गांधी के दौरे के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी भी सियासी संकेतों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव B. K. Hariprasad राहुल गांधी के साथ एक ही वाहन में अंबाला से कुरुक्षेत्र पहुंचे। इससे पहले अंबाला एयरपोर्ट पर दीपेंद्र हुड्डा सहित सभी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी का स्वागत किया।

कुरुक्षेत्र से वापसी के दौरान भी राहुल गांधी ने अपनी गाड़ी में केवल भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव नरेंद्र सिंह को साथ बिठाया, जिसे संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसके अलावा राहुल गांधी ने बी. के. हरिप्रसाद, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव नरेंद्र सिंह के साथ अलग से बैठक भी की, जिसमें संगठन की स्थिति, आगामी रणनीति और आंतरिक चुनौतियों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान राहुल गांधी का अंदाज भी चर्चा का विषय रहा। उन्होंने फुल ड्रेस में करीब आधे घंटे तक जिला अध्यक्षों को मार्शल आर्ट के दांव-पेंच भी सिखाए। इसे प्रतीकात्मक रूप से संगठन में अनुशासन, आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना को मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।

शिविर के दौरान पार्टी विरोधी बयानबाजी और गतिविधियों में लिप्त नेताओं को लेकर भी राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष को ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए, जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं या जिनकी गतिविधियां कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रही हैं। राहुल गांधी ने इशारों-इशारों में उन नेताओं को भी संदेश दिया, जो हाईकमान द्वारा तय किए गए कार्यक्रमों में पूरी गंभीरता और ताकत के साथ भागीदारी नहीं कर रहे हैं।

जिला अध्यक्षों ने भी राहुल गांधी के साथ बातचीत में ऐसे नेताओं को लेकर फीडबैक दिया। उन्होंने बताया कि कुछ नेताओं की बयानबाजी से अक्सर कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान होता है और भाजपा को इसका लाभ मिलता है। जिला अध्यक्षों का यह भी कहना रहा कि इस तरह के बयान मीडिया को कांग्रेस के खिलाफ नकारात्मक खबरें चलाने का आधार देते हैं, जिससे पार्टी की छवि और संगठनात्मक मजबूती प्रभावित होती है।

माहौल को कुछ हल्का करने के लिए राहुल गांधी ने अपने अंदाज में कहा कि लोग उनके नाम को लेकर तरह-तरह के मजाक और उलटे-सीधे नाम रखते हैं, लेकिन वह इसकी परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि राजनीति में आलोचना और व्यंग्य स्वाभाविक हैं और कार्यकर्ताओं को इससे विचलित नहीं होना चाहिए।

कुल मिलाकर कुरुक्षेत्र का यह दौरा कांग्रेस के लिए केवल एक प्रशिक्षण शिविर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे संगठन को फिर से धार देने, अनुशासन कड़ा करने और जमीनी स्तर पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के इस दौरे से यह साफ संदेश गया है कि पार्टी नेतृत्व अब संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और भीतर की कमजोरियों पर सीधे कार्रवाई के मूड में है, ताकि आने वाले राजनीतिक मुकाबलों में कांग्रेस अधिक संगठित और आक्रामक भूमिका निभा सके।

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