हरियाणा में 590 करोड़ रुपये का आईडीएफसी बैंक घोटाला: फर्जी चेक से निकाली गई सरकारी राशि, तीन आईएएस अधिकारी संदेह के घेरे में, एसीबी और उच्चस्तरीय जांच शुरू

Date:

Share post:

हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाले 590 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग घोटाले में अब चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि सरकारी धन की हेराफेरी कथित तौर पर फर्जी चेकों के माध्यम से की गई, जिसमें बैंक की चंडीगढ़ स्थित शाखा के कुछ कर्मचारियों की बाहरी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह लेन-देन डिजिटल माध्यम से नहीं बल्कि फिजिकल चेक ट्रांजेक्शन के जरिए किया गया, जिससे वित्तीय निगरानी की पारंपरिक प्रणालियों को दरकिनार किया गया। बताया जा रहा है कि जाली चेक तैयार कर उन पर नकद भुगतान जारी कराया गया और इसी तरीके से बड़ी राशि खातों से निकाली गई। इस पूरे प्रकरण ने हरियाणा में सरकारी खातों की सुरक्षा, निजी बैंकों में जमा सार्वजनिक धन और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हरियाणा सरकार के सात विभागों और उपक्रमों की राशि निजी बैंक के खातों में जमा थी, जिनमें पंचायत विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका जैसे विभाग शामिल हैं। वित्त सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने सभी संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से निजी बैंकों के खाते बंद कर राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाते स्थानांतरित करने के निर्देश जारी किए हैं। विभागों द्वारा खाते बंद करने और शेष राशि की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ खातों का मिलान कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट हो सके और आगे किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकी जा सके। इस घटनाक्रम ने सरकार को अपनी वित्तीय नीतियों और बैंकिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है।

मामले का दायरा चंडीगढ़ तक पहुंचने के कारण प्रारंभिक शिकायत सेक्टर-32 स्थित शाखा के अधिकार क्षेत्र के तहत चंडीगढ़ साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मूल मामला हरियाणा से संबंधित होने के कारण जांच की कमान हरियाणा पुलिस के पास है। सूत्रों के मुताबिक बैंक के उच्चाधिकारी भी चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले और एफआईआर दर्ज करने व आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई। यह मामला अब अंतरराज्यीय समन्वय और साइबर निगरानी तंत्र की परीक्षा बन गया है।

राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर और अधिक हलचल तब मची जब सूत्रों ने संकेत दिए कि हरियाणा सरकार के तीन आईएएस अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राज्य सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) जांच के साथ-साथ एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इस समिति में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल किए गए हैं ताकि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री से जब इस मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी के पारिवारिक संबंधों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

जांच के दौरान बड़ी राहत यह रही कि कुल संदिग्ध राशि में से लगभग 70 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में होल्ड कर लिए गए हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज ऑनलाइन शिकायत के बाद संभव हो सकी। बैंक द्वारा रविवार रात लगभग नौ बजे पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद पोर्टल की स्वचालित प्रणाली सक्रिय हुई और जिन खातों में संदिग्ध राशि ट्रांसफर हुई थी, उन्हें चिन्हित कर संबंधित बैंकों को अलर्ट भेजा गया। सोमवार देर रात तक 70 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर रोक लगा दी गई थी और शेष रकम को भी सुरक्षित करने के प्रयास जारी हैं। जिन खातों में लेन-देन हुआ, उन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है ताकि आगे किसी भी प्रकार का ट्रांजेक्शन न हो सके।

यह घोटाला हरियाणा की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, क्योंकि इसमें सरकारी विभागों की धनराशि, निजी बैंकिंग व्यवस्था और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की संभावित भूमिका जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं। विपक्ष इस मामले को पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रश्न से जोड़ रहा है, जबकि सरकार जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील कर रही है। आने वाले दिनों में एसीबी, पुलिस और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट इस प्रकरण की दिशा तय करेगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यह मामला हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय विवादों में से एक बन चुका है और इसकी गूंज विधानसभा से लेकर आम जनता तक सुनाई दे रही है।

This is a web generated news report.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Related articles

हरियाणा में किसान आक्रोश चरम पर: नियमों, कटौती और मंडी व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी

हरियाणा में रबी सीजन के बीच किसान असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के...

Tractor-Trolley Carrying Devotees Plunges into Gorge in Kangra district , 3 Dead, 32 Injured

Dharamshala (Arvind Sharma) | April 10, 2026   A tragic road accident in Himachal Pradesh’s Kangra district claimed the lives...

हरियाणा में राहत और सुधार की दोहरी पहल: फसल नुकसान पर त्वरित कार्रवाई, मजदूरों के वेतन में 35% तक बढ़ोतरी

हरियाणा सरकार ने एक ओर जहां बेमौसमी बारिश से प्रभावित किसानों के लिए राहत प्रक्रिया तेज की है,...

Procurement, Politics and Perception: Saini Takes on Congress While Recasting Haryana’s Farm Narrative

In a politically charged intervention that blends governance with electoral messaging, Haryana Chief Minister Nayab Singh Saini...