पंजाब की सियासत में हलचल: भाजपा नेता अमित गोसाईं ने छोड़ी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल में शामिल

Date:

Share post:


पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव भले ही अभी लगभग डेढ़ साल दूर हों, लेकिन राज्य की राजनीति में हलचल अभी से तेज होती दिखाई दे रही है। चुनावी माहौल की आहट के साथ ही नेताओं के राजनीतिक पाले बदलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित गोसाईं ने पार्टी से इस्तीफा देकर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया है।

अमित गोसाईं ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा को अलविदा कहा और शिरोमणि अकाली दल में औपचारिक रूप से शामिल हो गए। पार्टी अध्यक्ष Sukhbir Singh Badal ने स्वयं उन्हें पार्टी में शामिल करवाया और स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से अकाली दल को नई मजबूती मिलेगी।

पार्टी में शामिल होने के साथ ही सुखबीर सिंह बादल ने अमित गोसाईं को विधानसभा क्षेत्र लुधियाना सेंट्रल का हलका इंचार्ज भी नियुक्त किया। उन्होंने भरोसा जताया कि गोसाईं अपने अनुभव और जनसंपर्क के जरिए क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करेंगे। साथ ही अकाली दल में उनके साथ शामिल हुए समर्थकों को भी सम्मान और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की बात कही गई।

अमित गोसाईं का राजनीतिक परिवार से गहरा संबंध रहा है। वह पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय सतपाल गोसाईं के पोते हैं। अपने दादा के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में वह लंबे समय से सक्रिय रूप से सहयोग करते रहे हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान मानी जाती है।

अमित गोसाईं ने भाजपा में रहते हुए पार्टी के प्रवक्ता के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। लेकिन हाल ही में उन्होंने इस पद से भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी अलग होने का फैसला लिया और अकाली दल में शामिल हो गए।

इस घटनाक्रम से पहले सतपाल गोसाईं के परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर एक संदेश भी सामने आया था, जिसमें कहा गया था कि वह दुखी मन से भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। संदेश में यह भी कहा गया कि पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखकर मन दुखी है और इसी कारण यह फैसला लिया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ पंजाब की राजनीति में ऐसे घटनाक्रम और भी देखने को मिल सकते हैं। अक्सर चुनाव से पहले कई नेता अपनी राजनीतिक संभावनाओं और टिकट की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए पार्टी बदलने का फैसला करते हैं।

पंजाब में फिलहाल सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर संगठन को मजबूत करने और नए चेहरों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अमित गोसाईं का भाजपा छोड़कर शिरोमणि अकाली दल में शामिल होना राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी तैयारी के इस दौर में पंजाब की राजनीति में और कौन-कौन से नेता अपना राजनीतिक रास्ता बदलते हैं और इसका विभिन्न दलों की रणनीति पर क्या असर पड़ता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Related articles

राघव चड्ढा के कदम से अरविंद केजरीवाल को बड़ा सियासी झटका, पार्टी के भीतर ‘पीठ में छुरा’ जैसा वार

दो वर्षों से बढ़ती दूरी का अंत: राघव चड्ढा के बाहर जाने से आम आदमी पार्टी में गहराया...

AAP Alleges Political Poaching Bid in Punjab, Accuses BJP of Targeting Party Unity Through Raghav Chadha

A fresh political confrontation has erupted in Punjab as the state unit of the Aam Aadmi Party accused...

Major Political Upheaval: Multiple AAP Rajya Sabha MPs Defect to BJP, Party Faces Serious Setback

In a dramatic turn of events that could significantly reshape the political landscape, the Aam Aadmi Party (AAP)...

Political Shockwave in AAP: Raghav Chadha’s Defection Triggers Internal Rift Ahead of Punjab Polls

In a development that has sent tremors through the Aam Aadmi Party (AAP), senior leader Raghav Chadha has...