हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग का मुद्दा गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के कुछ विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे, जिसके चलते कांग्रेस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो हरियाणा में हुए राज्यसभा चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। मतदान के बाद मतगणना को लेकर भी काफी विवाद हुआ और देर रात तक राजनीतिक हलचल जारी रही। मतगणना प्रक्रिया में देरी के कारण मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, जिसके बाद रात लगभग 10 बजे गिनती शुरू हुई और करीब 1 बजे परिणाम घोषित किए गए। इस चुनाव में एक सीट पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, लेकिन नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष और सवाल खड़े हो गए।
चुनाव के तुरंत बाद यह चर्चा तेज हो गई कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया है। इसी को लेकर पार्टी नेतृत्व ने मामले की जांच के लिए अनुशासनात्मक समिति को सक्रिय किया। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने जानकारी दी कि पांच विधायकों में से तीन ने समिति के सामने अपना पक्ष रख दिया है, जबकि दो विधायकों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।
धर्मपाल मलिक ने कहा कि समिति ने सभी पहलुओं की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे अब पार्टी हाईकमान को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिन विधायकों ने अपना पक्ष नहीं रखा है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस विधायक शैली चौधरी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को ही वोट दिया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अनुशासनात्मक समिति के सामने अपना पक्ष विस्तार से रखा है और अब इस मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
इसी तरह विधायक रेणु बाला भी समिति के सामने अपना पक्ष रखने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी ईमानदारी से अपनी बात रखी है और यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। उनका कहना था कि सच्चाई सभी के सामने है और हरियाणा की जनता भी स्थिति को समझ रही है।
सूत्रों के अनुसार, एक अन्य विधायक ने भी लिखित रूप में अपना जवाब समिति को सौंपा है, जबकि जिन दो विधायकों ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, उन पर क्रॉस वोटिंग के आरोप और गहरे हो गए हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पार्टी संगठन की आंतरिक स्थिति को उजागर करती हैं और आगामी चुनावों पर इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए यह मामला केवल अनुशासन का नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्वसनीयता का भी बन गया है।
अब सबकी नजरें कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि आरोपित विधायकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय न केवल पार्टी के अंदर संदेश देगा, बल्कि हरियाणा की राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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