पंचकूला प्लॉट आवंटन मामला: विशेष अदालत ने भूपिंदर सिंह हुड्डा और एजेएल को दी राहत, ईडी केस बंद

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हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष अदालत से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने सेक्टर-6 स्थित संस्थागत प्लॉट के पुनः आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें और Associated Journals Limited (एजेएल) को डिस्चार्ज कर दिया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल द्वारा सुनाया गया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर मामले को समाप्त कर दिया गया।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह निर्णय उस मूल आपराधिक मामले में हाल ही में हुए घटनाक्रम के आधार पर लिया गया है, जिसकी जांच Central Bureau of Investigation (सीबीआई) कर रही थी। चूंकि आधार अपराध ही न्यायिक प्रक्रिया में समाप्त हो चुका है, ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी स्वतः ही टिक नहीं पाया। फिलहाल अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है, जिसमें कानूनी पहलुओं को और स्पष्ट किया जाएगा।

यह पूरा घटनाक्रम Punjab and Haryana High Court के 25 फरवरी के उस महत्वपूर्ण फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें वर्ष 2021 में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को रद्द कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने मूल आपराधिक कार्यवाही को ही निरस्त कर दिया था, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामला भी कमजोर पड़ गया।

दरअसल, यह मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में स्थित एक संस्थागत प्लॉट के आवंटन और उसके बाद पुनः आवंटन से जुड़ा हुआ है। यह प्लॉट वर्ष 1982 में हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA), जिसे अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के नाम से जाना जाता है, द्वारा Associated Journals Limited को आवंटित किया गया था। बाद में इस आवंटन को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं।

एजेएल की स्वामित्व संरचना भी इस मामले में चर्चा का केंद्र रही है, क्योंकि यह कंपनी Young Indian Private Limited के अधीन आती है। इस कंपनी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi और Rahul Gandhi प्रमुख शेयरधारक हैं, जिसके चलते यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील बना रहा।

अब जब हाईकोर्ट ने मूल आपराधिक मामले को ही खारिज कर दिया है, तो विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा ईडी के केस को समाप्त करना कानूनी प्रक्रिया का स्वाभाविक परिणाम माना जा रहा है। इस फैसले के बाद फिलहाल Bhupinder Singh Hooda और अन्य संबंधित पक्षों को राहत मिली है, हालांकि विस्तृत आदेश आने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

यह फैसला न केवल एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी इसके व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि मामला लंबे समय से चर्चा और विवाद का केंद्र बना हुआ था।

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