निवेश को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा में विनियमन में ढील का व्यापक अभियान, सर्वग्राही विधेयक से मिलेगा संस्थागत आधार

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चंडीगढ़ में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हरियाणा सरकार ने निवेश को आकर्षित करने और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से विनियमन में ढील देने का व्यापक अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत प्रस्तावित सर्वग्राही विधेयक के माध्यम से विभिन्न सुधारों को एकीकृत कानूनी ढांचे में समाहित कर उन्हें स्थायी आधार देने की तैयारी की जा रही है। यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने, उद्योगों की स्थापना को सरल बनाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी व प्रभावी बनाने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक में इस सुधार अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें विभिन्न विभागों द्वारा किए गए सुधारों, अनुपालन में कमी और दूसरे चरण के विनियमन सुधारों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सरकार का उद्देश्य केवल नीतिगत घोषणाएं करना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर वास्तविक बदलाव सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में 28 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सुधारों की प्रगति का आकलन किया गया, जिनका लक्ष्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, स्वीकृति प्रणाली को तेज करना और नागरिकों तथा उद्यमों के लिए सुगम व्यवस्था तैयार करना है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित सर्वग्राही विधेयक विभिन्न नियामकीय बदलावों को एक मंच पर लाएगा, जिससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और अनावश्यक जटिलताओं में कमी आएगी। लंबे समय से उद्योग जगत द्वारा उठाई जा रही लालफीताशाही की समस्या को समाप्त करने के लिए यह विधेयक एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आ सकता है। इससे न केवल प्रक्रियाएं तेज होंगी, बल्कि निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा।

भूमि और निर्माण से जुड़े नियमों में भी बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार राज्य के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में अब भूमि उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता नहीं रह गई है, जिससे निवेशकों और भूमि मालिकों को बड़ी राहत मिली है। शेष क्षेत्रों में भी स्वीकृति प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी। यह व्यवस्था पहले से औद्योगिक क्षेत्रों में लागू है और इसे अन्य क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से विस्तारित करने की योजना है।

निर्माण क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित हैं। कब्जा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक अनुमोदनों को सरल बनाया जा रहा है और कई अनावश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्रों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे परियोजनाओं के पूरा होने में होने वाली देरी कम होगी और निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी।

उद्योगों के लिए एकल खिड़की प्रणाली को और सशक्त बनाने की दिशा में भी सरकार सक्रिय है। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को एक समेकित मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विभिन्न विभागों से संबंधित सभी स्वीकृतियां एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए सेवा स्तर समझौते लागू किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य लगभग 30 दिनों के भीतर स्वीकृति प्रदान करना है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल निगरानी तंत्र भी विकसित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक आवेदन की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को इस सुधार अभियान के केंद्र में रखा गया है। नए प्रावधानों के तहत औद्योगिक भूखंडों के विभाजन, व्यावसायिक गतिविधियों में बदलाव और संपत्तियों के हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। प्रस्तावित ‘व्यवसाय करने का अधिकार’ कानून के माध्यम से उद्यमियों को स्व-घोषणा के आधार पर कार्य प्रारंभ करने की अनुमति देने की योजना है, जिससे प्रारंभिक चरण में निरीक्षणों का दबाव कम होगा और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन के लिए विशेष कोष स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे इन क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा सके। इसके अलावा अपशिष्ट प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा जैसी सुविधाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे लागत में कमी और दक्षता में वृद्धि सुनिश्चित होगी।

राज्य सरकार पारंपरिक नियमों की जगह आधुनिक और जोखिम आधारित अग्नि सुरक्षा मानकों को अपनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ संचालन लागत में भी कमी आएगी। अनावश्यक लाइसेंसों को समाप्त करने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा रहा है।

यह व्यापक सुधार अभियान इस बात का संकेत है कि हरियाणा सरकार निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर गंभीर है और वैश्विक मानकों के अनुरूप एक प्रतिस्पर्धी आर्थिक वातावरण तैयार करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। यदि इन सुधारों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो राज्य न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

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