पंचकूला नगर निगम चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 में से 17 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। चुनाव परिणामों ने नगर निगम में भाजपा की मजबूत पकड़ को फिर साबित कर दिया है। वहीं कांग्रेस को केवल एक वार्ड में सफलता मिली, जबकि दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
चुनाव परिणामों के अनुसार वार्ड नंबर-1 से भाजपा की परमजीत कौर लुभाना ने 2358 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। वार्ड नंबर-2 में भाजपा की परमजीत कौर ने 1979 मतों से जीत दर्ज की। वार्ड नंबर-3 से भाजपा उम्मीदवार सुरेश कुमार वर्मा 1087 मतों से विजयी रहे।
वार्ड नंबर-4 में भाजपा के भारत हितैषी ने 2565 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जबकि वार्ड नंबर-5 से जय कुमार कौशिक ने 1810 मतों से जीत हासिल की। वार्ड नंबर-6 में भाजपा के पार्थ गुप्ता 866 मतों से विजयी रहे।
वार्ड नंबर-7 में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा, जहां भाजपा के ज्योति प्रसाद ने मात्र 79 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड नंबर-8 में भाजपा के राज कुमार जैन 948 मतों से विजयी रहे, जबकि वार्ड नंबर-9 से हरेंद्र मलिक ने 1623 मतों से जीत हासिल की।
वार्ड नंबर-10 में भाजपा के शेखर ने बेहद करीबी मुकाबले में केवल 59 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड नंबर-11 से भाजपा की अनुराधा पुरी 1209 मतों से विजयी रहीं।
वार्ड नंबर-12 में भाजपा के राकेश जगोता ने 2872 मतों के सबसे बड़े अंतर में से एक के साथ जीत हासिल की। वार्ड नंबर-13 से दीपक गर्ग 2267 मतों से विजयी रहे, जबकि वार्ड नंबर-14 में भाजपा के राकेश गोयल ने 2502 मतों से जीत दर्ज की।
वार्ड नंबर-15 से भाजपा की प्रियंका ने 965 मतों से जीत हासिल की, जबकि वार्ड नंबर-16 में निर्मला देवी 360 मतों से विजयी रहीं।
वार्ड नंबर-17 में निर्दलीय उम्मीदवार अशोक कुमार ने 754 मतों से जीत दर्ज कर भाजपा-कांग्रेस दोनों को चुनौती दी। वार्ड नंबर-18 में कांग्रेस को एकमात्र सफलता मिली, जहां अमनदीप कौर ने 165 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
वार्ड नंबर-19 में भाजपा की मनीषा रानी 1180 मतों से विजयी रहीं, जबकि वार्ड नंबर-20 में निर्दलीय उम्मीदवार रोहित चौधरी ने 966 मतों से जीत हासिल की।
इन परिणामों के साथ पंचकूला नगर निगम में भाजपा का वर्चस्व और मजबूत हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत हरियाणा में भाजपा के संगठनात्मक आधार और शहरी क्षेत्रों में उसके जनाधार को और मजबूती देने वाली साबित होगी। वहीं कांग्रेस के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय माना जा रहा है।


