राजनीति

हरियाणा में 100 बड़ी विकास परियोजनाओं पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सीधी निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन पर सरकार का फोकस

हरियाणा में विकास परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने व्यापक आर्थिक,...

हरियाणा में 590 करोड़ रुपये का आईडीएफसी बैंक घोटाला: फर्जी चेक से निकाली गई सरकारी राशि, तीन आईएएस अधिकारी संदेह के घेरे में, एसीबी...

हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाले 590 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग घोटाले में...

अंबाला में दिखा मनोहर लाल खट्टर का बहुभाषी व्यक्तित्व, मलयालम में संवाद कर जीता दिल

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar एक अनुशासित, सादगीपूर्ण और ज़मीन से जुड़े नेता के रूप में पहचाने...

पंजाब बचाओ’ रैली में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आह्वान – विकास, सुरक्षा और सुशासन का समय

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अमृतसर में आयोजित ‘पंजाब बचाओ रैली’ को संबोधित करते हुए...
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“पहलगाम हमले के बाद की चुप्पी: एक रणनीति या कुछ भी नहीं?”

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देश की राजधानी दिल्ली में एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई है। केंद्र की...

चॉक से चुभता शोषण: प्राइवेट स्कूल का मास्टर और उसकी गूंगी पीड़ा।

"प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर" प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों से उम्मीदें तो आसमान छूती हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित...

मेडिकल कॉलेज, कोरियावास के नामकरण का विरोध अनुचित

निंदनीय है महर्षि च्यवन का अपमान : डॉ. 'मानव' नारनौल। ग्राम पंचायत, कोरियावास ने मेडिकल कॉलेज के लिए बिना शर्त उनासी एकड़ जमीन देकर बहुत...

सर्वोदय युवा संसद में अनुराग ठाकुर का युवाओं से संवाद: विकसित भारत, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक न्याय पर रखा स्पष्ट दृष्टिकोण

   दिल्ली के प्रतिष्ठित हिन्दू महाविद्यालय में आयोजित 'सर्वोदय युवा संसद 2025' में केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने देशभर से...

सुखबीर बादल की वापसी: नई बोतल में पुरानी शराब या अकाली दल का पुनरुत्थान?

अमृतसर से पंजाब की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष फतेह जंग सिंह बाजवा ने सुखबीर सिंह बादल...

13 अप्रैल 1919, अमृतसर। वैसाखी का दिन। सत्ता, शहादत और सवाल: जलियांवाला बाग की आज की प्रासंगिकता

जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) केवल ब्रिटिश अत्याचार का प्रतीक नहीं, बल्कि आज के भारत में सत्ता और लोकतंत्र के बीच जटिल रिश्ते का प्रतिबिंब...
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