NEET विवाद के बीच केजरीवाल का गोवा दौरा: छात्र की आत्महत्या ने उठाए परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल

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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 के रद्द होने के बाद उपजे विवाद ने एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया, जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल गोवा के उस 17 वर्षीय छात्र सिद्धार्थ हेगड़े के घर पहुंचे, जिसने कथित तौर पर परीक्षा रद्द होने से आहत होकर आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि देशभर के लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करती है।

गोवा में शोक संतप्त परिवार से मुलाकात के दौरान केजरीवाल ने इस घटना को अत्यंत दुखद और झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि एक प्रतिभाशाली छात्र का इस तरह अपनी जान गंवाना पूरे समाज और व्यवस्था के लिए चेतावनी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में ऐसा कठोर कदम न उठाएं, क्योंकि वे देश की सबसे बड़ी उम्मीद हैं और उनका जीवन अत्यंत मूल्यवान है।

इस दौरान केजरीवाल ने NEET परीक्षा प्रणाली पर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि हर वर्ष इस तरह परीक्षाएं रद्द होती हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि इसके पीछे संगठित और प्रभावशाली नेटवर्क काम कर रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के शिक्षा तंत्र में भरोसे के संकट का संकेत है। लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो उनका मनोबल टूट जाता है और भविष्य अनिश्चित हो जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि भारत की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं को कैसे रोका जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी सुधार ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कड़ी निगरानी भी आवश्यक है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

केजरीवाल ने अंत में कहा कि समाज, सरकार और संस्थाओं को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, ताकि किसी भी छात्र को भविष्य को लेकर इतनी निराशा का सामना न करना पड़े। यह घटना एक गहरी चेतावनी है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार अब टाला नहीं जा सकता।

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