कानूनों और सरकारी नियमों का बनेगा डिजिटल भंडार, हरियाणा सरकार शुरू करेगी केंद्रीकृत ऑनलाइन रिपॉजिटरी

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हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और नियामकीय सुधारों को नई गति देने के लिए राज्य के सभी प्रमुख कानूनों, नियमों और नीतिगत दस्तावेजों को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के सभी अधिनियमों, नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों, परिपत्रों, अधिसूचनाओं, नीतियों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की केंद्रीकृत डिजिटल ऑनलाइन रिपॉजिटरी तैयार करने का निर्णय लिया है।

इस महत्वाकांक्षी पहल के साथ-साथ सरकार ने विभिन्न विभागों में लागू पुराने, अप्रासंगिक और अनावश्यक हो चुके कानूनों एवं नियमों की व्यापक समीक्षा प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, प्रभावी और नागरिकों के अनुकूल बनाया जा सके।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि राज्य के सभी विभागों से संबंधित अधिनियमों, विभागीय नियमों, कार्यकारी आदेशों, परिपत्रों, अधिसूचनाओं तथा शहरी निकायों के नियमों सहित महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इस पोर्टल में उन्नत सर्च सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे नागरिक, उद्योग, शोधकर्ता और सरकारी अधिकारी आवश्यक दस्तावेजों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

सरकार के अनुसार यह रिपॉजिटरी राज्य के वैधानिक, नियामकीय और नीतिगत दस्तावेजों का एक विश्वसनीय डिजिटल केंद्र बनेगी। दस्तावेजों को विषयवार, क्षेत्रवार और अंतिम अद्यतन तिथि के आधार पर व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को प्रमाणिक और अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगी।

परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन आने वाले अधिनियमों, नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं, परिपत्रों और नीतिगत दस्तावेजों की संपादन योग्य सॉफ्ट कॉपी (एमएस वर्ड प्रारूप में) तैयार कर 25 जून 2026 तक उपलब्ध कराएं। इसके बाद पोर्टल के शुरू होते ही इन दस्तावेजों को डिजिटल रिपॉजिटरी में अपलोड किया जाएगा।

सरकार ने केवल डिजिटलीकरण तक ही इस पहल को सीमित नहीं रखा है, बल्कि प्रशासनिक सुधार एजेंडा के तहत वर्तमान नियामकीय ढांचे की भी व्यापक समीक्षा शुरू की है। विभागों को ऐसे प्रावधानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जो समय के साथ अप्रासंगिक, दोहरावपूर्ण या अनावश्यक रूप से जटिल हो गए हैं। ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं को समाप्त करने, संशोधित करने या अधिक व्यावहारिक बनाने पर विचार किया जाएगा।

यह समीक्षा छह प्रमुख सुधार सिद्धांतों के आधार पर की जा रही है। इनमें केवल उच्च जोखिम वाली गतिविधियों के लिए लाइसेंस या पूर्व स्वीकृति व्यवस्था बनाए रखना, अन्य मामलों में स्व-पंजीकरण प्रणाली को बढ़ावा देना, लाइसेंसों की वैधता अवधि को अधिक लंबा या आजीवन करना, प्रक्रियाओं के बजाय परिणाम आधारित नियमन को प्रोत्साहित करना, स्वतंत्र थर्ड पार्टी निरीक्षण प्रणाली को बढ़ावा देना तथा जोखिम आधारित निरीक्षण तंत्र को लागू करना शामिल है।

सरकार का मानना है कि इन सुधारों से अनुपालन संबंधी बोझ कम होगा, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, निवेश और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा तथा नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक सरलता से प्राप्त हो सकेगा।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे समीक्षा प्रक्रिया पूरी कर 3 जुलाई 2026 तक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इन रिपोर्टों में उन कानूनों, नियमों और प्रक्रियाओं का पूरा विवरण शामिल होगा जिन्हें संशोधन, सरलीकरण या निरसन के लिए चिन्हित किया गया है, साथ ही सुधार एजेंडा के तहत उठाए गए कदमों की जानकारी भी देनी होगी।

सरकार की इस पहल को राज्य में डिजिटल प्रशासन, नियामकीय सुधार और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में सरकारी सूचनाओं तक पहुंच अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सकेगी।

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