गुरुग्राम मेट्रो परियोजना को बड़ी मंजूरी, लागत बढ़कर 10,266 करोड़ रुपये पहुंची; वर्ल्ड बैंक करेगा सॉफ्ट लोन का वित्तपोषण

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Nayab Singh Saini की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में गुरुग्राम मेट्रो रेल परियोजना से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल ने मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की संशोधित लागत, रैपिड मेट्रो और गुरुग्राम रेलवे स्टेशन स्पर लिंक से संबंधित पूरक रिपोर्टों तथा परियोजना के सॉफ्ट लोन हिस्से को World Bank के माध्यम से वित्तपोषित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।

सरकार के इस फैसले को गुरुग्राम की शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और लंबे समय से प्रतीक्षित मेट्रो कनेक्टिविटी परियोजना को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेजी से विकसित हो रहे गुरुग्राम में यह परियोजना ट्रैफिक दबाव कम करने और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक लगभग 28.50 किलोमीटर लंबी इस मेट्रो लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मैसर्स राइट्स द्वारा तैयार की गई थी। परियोजना में कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसे पहले 13 अगस्त 2020 को हरियाणा मंत्रिपरिषद और बाद में केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी थी।

अब मंत्रिमंडल ने परियोजना की लागत को संशोधित करते हुए इसे 5,452.72 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,266.54 करोड़ रुपये करने को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार लागत में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें 2019 से 2023 के बीच निर्माण सामग्री और अन्य मदों की कीमतों में बढ़ोतरी, जीएसटी दरों में बदलाव, स्वतंत्र मेट्रो कॉरिडोर के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता, पूर्ण डिपो निर्माण, अतिरिक्त रोलिंग स्टॉक, आरआरटीएस एलाइनमेंट में बदलाव और गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक मेट्रो स्पर लिंक शामिल हैं।

संशोधित लागत संरचना के अनुसार कीमतों और जीएसटी में बदलाव के कारण परियोजना लागत में 7,098.70 करोड़ रुपये का संशोधन किया गया है। वहीं स्वतंत्र कॉरिडोर आवश्यकताओं के लिए 947.06 करोड़ रुपये तथा सेक्टर-5 से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक मेट्रो स्पर निर्माण के लिए 454.32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मंत्रिमंडल ने रैपिड मेट्रो के साथ जुड़ाव से संबंधित पूरक रिपोर्ट को भी मंजूरी दी। इस रिपोर्ट में गुरुग्राम मेट्रो को स्वतंत्र परियोजना के रूप में विकसित करने से जुड़े लागत प्रभावों का उल्लेख किया गया है। इसके तहत सेक्टर-33, गुरुग्राम में लगभग 22.86 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर डिपो और संबंधित सुविधाओं के विकास का भी प्रस्ताव शामिल है।

इसके अलावा सेक्टर-5 स्टेशन से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक लगभग 1.80 किलोमीटर लंबे मेट्रो स्पर को भी मंजूरी दी गई है। इस लिंक का उद्देश्य मेट्रो और रेलवे सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और यात्रियों को निर्बाध यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है। माना जा रहा है कि इससे गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रिमंडल ने परियोजना के पूरे सॉफ्ट लोन हिस्से को वर्ल्ड बैंक के माध्यम से वित्तपोषित करने को मंजूरी दी। मूल परियोजना लागत में 2,688.57 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन प्रस्तावित था, जिसमें से 1,075.42 करोड़ रुपये वर्ल्ड बैंक और 1,613.14 करोड़ रुपये European Investment Bank से मिलने थे।

हालांकि यूरोपीय निवेश बैंक से स्वीकृति में लगातार देरी के चलते गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड के बोर्ड ने अक्टूबर 2025 में निर्णय लिया था कि परियोजना में देरी से बचने के लिए ईआईबी के हिस्से का वित्तपोषण भी वर्ल्ड बैंक से कराया जा सकता है। इस प्रस्ताव को बाद में दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री की मंजूरी भी मिल गई थी।

मंत्रिमंडल ने परियोजना से जुड़े समझौतों और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, हरियाणा के प्रशासनिक सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त करने को भी स्वीकृति प्रदान की। साथ ही मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार के साथ परामर्श के दौरान आवश्यक बदलावों या संशोधनों को मंजूरी देने तथा परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अधिकृत किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में यह मेट्रो परियोजना आने वाले वर्षों में यातायात व्यवस्था, शहरी गतिशीलता और आर्थिक गतिविधियों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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