गौ संरक्षण और गौ संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार कर रही काम – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

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मुख्यमंत्री ने फतेहाबाद जिला की 67 गौशालाओं को सौंपे 7 करोड़ 2 लाख रुपये के चारा अनुदान राशि के चैक

गांव बड़ोपल के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने की 21 लाख रुपये देने की घोषणा

बड़ोपल के वन्य जीव उपचार केंद्र का नाम राजेंद्रानंद जी महाराज के नाम पर रखने की भी घोषणा

फतेहाबाद : हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ संरक्षण और गौ संवर्धन के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश में गौशालाओं को चारे के लिए वित्तीय अनुदान के साथ-साथ उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री शनिवार को जिला फतेहाबाद में श्री कृष्ण गौशाला, बड़ोपल में गौशालाओं को चारा अनुदान राशि वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री ने राजेंद्रानंद महाराज को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और उनके जीवन को प्रेरणा स्‍त्रोत बताते हुए नागरिकों से आह्वान किया कि वे उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाएं। मुख्यमंत्री ने गौशाला प्रांगण में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत त्रिवेणी लगाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिला की 67 गौशालाओं को 7 करोड़ 2 लाख रुपये के चारा अनुदान राशि के चैक गौशाला प्रबंधकों को सौंपे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश की 605 गौशालाओं के लिए कुल 88 करोड़ 50 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की जा रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांव बड़ोपल के विकास के लिए 21 लाख रुपये देने और बड़ोपल में वन्य जीव उपचार केंद्र का नाम श्री राजेंद्रानंद महाराज के नाम पर करने की घोषणा की। साथ ही मुख्यमंत्री ने फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र के लिए रखी गई छः मांगों को विभागीय स्तर पर फिजिबिलिटी चैक करने उपरांत पूरा करने की भी घोषणा की। समारोह में कृषि एवं किसान कल्याण और पशुपालन मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, लोक निर्माण मंत्री श्री रणबीर सिंह गंगवा और राज्यसभा सांसद श्री सुभाष बराला ने गौशाला बड़ोपल को 11-11 लाख रुपये देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में डबल इंजन सरकार गाय, गीता और गंगा के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है।

प्रदेश में गौशालाओं को चारे के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए मांग अनुसार मशीनरी खरीद के लिए मदद दी जा रही है। पंचगव्य उत्पादन के लिए 101 गौशालाओं को 6 करोड़ 50 लाख रुपये की मशीन खरीदने की अनुदान राशि दी गई है।

उन्होंने कहा कि साढ़े 10 वर्षों में चारे के लिए 358 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि अनुदान के रूप में दी जा चुकी है। 330 गौशालाओं में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाए गए हैं और शेष बची गौशालाओं में यह काम शीघ्र शुरू करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 तक प्रदेश में केवल 215 पंजीकृत गौशालाओं में एक लाख 75 हजार गौवंश था। प्रदेश सरकार ने पिछले दस वर्षों में इसमें ईजाफा किया है और इस समय प्रदेश में 686 पंजीकृत गौशालाएं हैं। इनमें 4 लाख बेसहारा गौवंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। वर्ष 2014-15 में गौ सेवा आयोग के लिए केवल 2 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 595 करोड़ रुपये किया है। प्रदेश सरकार ने गौवंश के पुनर्वास के लिए 200 गौशालाओं को शैड बनाने के लिए दस लाख रुपये प्रति गौशाला को अनुदान दिया है। इनमें से 51 गौशालाओं में शैड बनकर तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं को 800 ई-रिक्शा दी जाएगी। इसके लिए खरीद प्रक्रिया जारी है।

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