चंडीगढ़ में हरियाणा सचिवालय से छलांग लगाकर आत्महत्या, प्रशासनिक हलकों में शोक और स्तब्धता
चंडीगढ़ से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां Haryana Secretariat की ऊपरी मंजिल से एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना प्रशासनिक गलियारों में गहरे शोक और सदमे का कारण बन गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान Ganesh Das Arora के रूप में हुई है, जो सचिवालय में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे और एक आईएएएस अधिकारी के कार्यालय से संबद्ध जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उनकी सेवानिवृत्ति में मात्र पांच महीने का समय शेष था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन्होंने सचिवालय की छठी मंजिल से छलांग लगाई। घटना के तुरंत बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा कर्मियों ने राहत एवं बचाव के प्रयास शुरू किए। मौके का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नीचे लोगों की भीड़, तनावपूर्ण माहौल और सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा मदद के लिए आवाज़ लगाते हुए दृश्य दिखाई दे रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही Chandigarh Police मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है और सभी पहलुओं से मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
कारणों पर सस्पेंस, जांच जारी
अधिकारियों के अनुसार, अभी तक कोई सुसाइड नोट या प्रत्यक्ष कारण सामने नहीं आया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मृतक एक अनुभवी और शांत स्वभाव के अधिकारी माने जाते थे, जिससे यह घटना और भी अधिक चौंकाने वाली बन गई है।
पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज, कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड, और कर्मचारियों के बयान खंगाले जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि घटना के पीछे मानसिक तनाव, व्यक्तिगत कारण, या कोई अन्य दबाव जिम्मेदार था या नहीं।
सचिवालय और प्रशासनिक जगत में शोक
इस दुखद घटना से हरियाणा सचिवालय सहित प्रशासनिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है। सहकर्मियों और अधिकारियों के बीच इस हादसे को लेकर संवेदना और स्तब्धता का माहौल है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अचानक इस तरह जीवन समाप्त करने की घटना ने प्रशासनिक प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य, कार्यदबाव और संवेदनशीलता जैसे मुद्दों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है। यह त्रासदी केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए आत्ममंथन का विषय बनकर सामने आई है—जहां जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के मानसिक और भावनात्मक दबाव को समझने की आवश्यकता और अधिक गहराई से महसूस की जा रही है।


