चिकित्सा अधिकारियों को गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक के गर्भपात को रिवर्स ट्रैक करने का दिया निर्देश

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प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार के लिए एसीएस सुधीर राजपाल ने राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साप्ताहिक बैठक की अध्यक्षता की

हरियाणा का लिंगानुपात इस वर्ष 7 जुलाई तक सुधरकर 904 हो गयाजो पिछले वर्ष इसी अवधि में 903 था

हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव के निर्देशानुसार हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार के लिए गठित राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साप्ताहिक बैठक आज यहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने तथा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत राज्य के लिंगानुपात में और सुधार लाने के प्रयासों को तेज करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। हरियाणा का लिंगानुपात इस वर्ष 7 जुलाई तक सुधरकर 904 हो गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 903 था।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अवैध गर्भपात के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया तथा अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इसमें संलिप्त पाए जाने वाले डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करने सहित कठोर दंडात्मक कदम उठाएं। ऐसे ही एक मामले में, अवैध गर्भपात के आरोप में नूंह जिले में दो नर्सिंग होम को सील कर दिया गया। इसके अलावा, सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को अवैध गर्भपात गतिविधियों में लिप्त बीएएमएस डॉक्टरों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और हर हफ्ते एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र स्तर पर लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप मई की तुलना में जून में जन्म पंजीकरण के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अभियान को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों को आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर, खासकर जिला पलवल, नूंह, गुरुग्राम और फरीदाबाद के झुग्गी-झोपड़ियों और कम आय वाले क्षेत्रों में अपंजीकृत बच्चों की पहचान करने और उनका पंजीकरण करने का निर्देश दिया। इसका लक्ष्य एक महीने के भीतर सभी लंबित पंजीकरण पूरा करना है।

बैठक में एसीएस ने सीएमओ को गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक किए गए गर्भपात की रिवर्स ट्रैकिंग शुरू करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य ऐसी प्रक्रियाओं में शामिल चिकित्सकों की पहचान करना तथा उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई शुरू करना है। रिवर्स ट्रैकिंग के लिए एक व्यापक प्रक्रिया पहले ही सभी सीएमओ के साथ साझा की जा चुकी है।

आईवीएफ केन्द्रों के विनियमन के संबंध में, टास्क फोर्स ने निर्णय लिया कि एक या दो बच्चों वाले दम्पतियों को आईवीएफ के माध्यम से दूसरा बच्चा चाहने पर जिला समुचित प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि अवैध मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) केंद्रों पर कड़ी कार्रवाई के कारण राज्य भर में लगभग 500 ऐसे केंद्र बंद कर दिए गए हैं। इसके कारण पिछले दो महीनों में वैध एमटीपी में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पहल के तहत सार्वजनिक पार्कों में जागरूकता अभियान सक्रिय रूप से चलाए जा रहे हैं तथा मोबाइल अलर्ट के माध्यम से संदेश प्रसारित करने के लिए दूरसंचार कंपनियों की मदद ली जा रही है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक श्री रिपुदमन सिंह ढिल्लों तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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