जनता के पैसे के इस्तेमाल पर सख्त मुख्यमंत्री सैनी, 252 करोड़ की खरीद मंजूर करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही पर दिया जोर

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Nayab Singh Saini ने एक बार फिर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी सरकार सरकारी खर्च को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और जवाबदेही से जुड़ा विषय मानती है। सोमवार देर शाम हरियाणा निवास में आयोजित हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों से जुड़े लगभग 252 करोड़ रुपये के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, लेकिन बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सरकारी धन के विवेकपूर्ण उपयोग और पारदर्शिता को लेकर मुख्यमंत्री का सख्त रुख रहा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कई कंपनियों के साथ सीधे स्तर पर नैगोशिएशन कर विभिन्न उपकरणों और सेवाओं की दरों में उल्लेखनीय कमी सुनिश्चित करवाई। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार का पैसा वास्तव में जनता का पैसा है और सरकार केवल उसकी संरक्षक है। ऐसे में प्रत्येक खरीद प्रक्रिया में जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धी दरों का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि किसी भी खरीद से पहले बाजार दरों, पिछले वर्षों की दरों और अन्य राज्यों में लागू दरों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए ताकि सरकारी धन का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित हो सके। प्रशासनिक हलकों में इसे मुख्यमंत्री सैनी की वित्तीय अनुशासन और परिणाम आधारित प्रशासन की कार्यशैली के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में Haryana Police के लिए सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच पुलिस बल को तकनीकी और सुरक्षा संसाधनों से सशक्त बनाना आवश्यक है।

इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। Dakshin Haryana Bijli Vitran Nigam और Uttar Haryana Bijli Vitran Nigam के लिए लगभग 175 करोड़ रुपये की लागत से 50 स्क्वेयर एमएम क्षमता वाले 18,000 रैबिट कंडक्टर की खरीद को मंजूरी प्रदान की गई। माना जा रहा है कि इससे बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत करने और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

इसी क्रम में Haryana Vidyut Prasaran Nigam Limited के लिए लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न प्रकार के 132/66 केवी सीएंडआर पैनल्स खरीदने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। यह खरीद राज्य की ट्रांसमिशन प्रणाली को अधिक सक्षम और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक में परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। Haryana Roadways की साधारण बसों, एसी बसों, मिनी बसों और ड्राइवर ट्रेनिंग स्कूल की बसों के लिए दो वर्ष की बीमा योजना को मंजूरी दी गई। विशेष बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने सरकारी बीमा कंपनी United India Insurance Company के साथ बातचीत कर बीमा दरों को पिछले वर्ष के स्तर पर ही बनाए रखने पर सहमति सुनिश्चित की।

सरकारी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री का जोर केवल मंजूरी देने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया कि प्रत्येक खर्च का सीधा लाभ जनता तक पहुंचे और अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचा जा सके।

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कार्यशैली में वित्तीय अनुशासन, प्रशासनिक निगरानी और खर्चों की सूक्ष्म समीक्षा लगातार प्रमुखता से उभर रही है। ऐसे समय में जब राज्यों के सामने वित्तीय संतुलन और विकास कार्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने की चुनौती है, हरियाणा सरकार का यह रुख प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और खरीद प्रस्तावों के तकनीकी तथा वित्तीय पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकारी संसाधनों का हर निर्णय अंततः जनता के हित और राज्य के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।

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