चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश, माननीय जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु के असामयिक निधन से न्यायिक जगत, अधिवक्ता समुदाय और समाज के विभिन्न वर्गों में गहरा शोक व्याप्त है। उनके निधन को न्यायपालिका के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
एक साधारण किसान परिवार से निकलकर न्यायपालिका के उच्चतम दायित्वों तक पहुंचने वाले जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का जीवन संघर्ष, सादगी, ईमानदारी और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रेरक उदाहरण रहा। अपनी मेधा, अथक परिश्रम और निष्पक्ष न्यायिक दृष्टिकोण के बल पर उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में विशिष्ट पहचान स्थापित की और अपने निर्णयों तथा कार्यशैली से व्यापक सम्मान अर्जित किया।
कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा सदैव उनकी पहचान रही। अपने न्यायिक दायित्वों के निर्वहन के दौरान उन्होंने निष्पक्षता, पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यही कारण है कि वे न्यायिक समुदाय के साथ-साथ अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के बीच भी अत्यंत सम्मानित रहे।
जस्टिस सिंधु का व्यक्तित्व केवल एक न्यायाधीश तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सादगीपूर्ण जीवन, मानवीय संवेदनाओं और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना के लिए भी जाने जाते थे। उनका संपूर्ण जीवन यह संदेश देता है कि समर्पण, मेहनत और ईमानदारी के बल पर किसी भी साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
उनके निधन पर विभिन्न न्यायिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे न्यायपालिका के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों, शुभचिंतकों तथा समूचे न्यायिक समुदाय के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।

