राजभाषा नीति में उत्कृष्टता के लिए एसजेवीएन को मिला ‘राजभाषा प्रभा’ विशेष पुरस्कार

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एसजेवीएन को वर्ष 2023-24 के दौरान राजभाषा नीति के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित ‘राजभाषा प्रभा’ विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित विद्युत मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक के दौरान एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) श्री भूपेंद्र गुप्ता को माननीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल के कर कमलों से प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक, विद्युत मंत्रालय के सचिव श्री पंकज अग्रवाल और मंत्रालय के अधीनस्थ विभिन्न उपक्रमों एवं संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

यह पुरस्कार एसजेवीएन द्वारा अपनी परियोजनाओं और कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी उपयोग और उसके संवर्धन के लिए किए गए प्रयासों की सराहना के रूप में प्रदान किया गया है। राजभाषा के माध्यम से संगठनात्मक कार्यों में पारदर्शिता, समावेशिता और राष्ट्रीय भाषा की प्रतिष्ठा को बढ़ावा देने की दिशा में एसजेवीएन का यह योगदान उल्लेखनीय माना गया है। हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर संस्थान की गंभीरता और निरंतर सक्रियता के चलते यह पुरस्कार संस्था को प्राप्त हुआ, जिससे कंपनी के अंदरूनी तंत्र में हिंदी के व्यवहार को और भी सशक्त आधार मिला है।

बैठक के दौरान एसजेवीएन के राजभाषा अनुभाग की गृह पत्रिका का भी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा विमोचन किया गया, जो हिंदी में हो रहे सृजनात्मक और व्यावसायिक कार्यों का एक सशक्त दस्तावेज है। एसजेवीएन ने राजभाषा के क्षेत्र में तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अपनी प्रतिबद्धता को न केवल सिद्ध किया है बल्कि अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।

यह पुरस्कार विद्युत मंत्रालय द्वारा अपने अधीनस्थ उपक्रमों एवं संस्थानों में हिंदी भाषा के प्रयोग और प्रसार को बढ़ावा देने हेतु स्थापित किया गया है। मंत्रालय द्वारा प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन राजभाषा नीति के विभिन्न आयामों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, जिनमें पत्राचार, रिपोर्टिंग, प्रकाशन, प्रशिक्षण और हिंदी के तकनीकी प्रयोग जैसे बिंदु शामिल होते हैं।

एसजेवीएन द्वारा बिजली उत्पादन के क्षेत्र में तो महत्वपूर्ण योगदान दिया ही जा रहा है, लेकिन राजभाषा हिंदी के माध्यम से भारत की भाषाई सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का जो प्रयास किया गया है, वह भी एक नई ऊर्जा का संचार करता है। यह पुरस्कार इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक भाषा एक साथ मिलकर कैसे राष्ट्र निर्माण में सशक्त भूमिका निभा सकती हैं।

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