झाकड़ी: हिमाचल प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाने वाली Satluj River घाटी में शनिवार को उस समय सायरनों की गूंज सुनाई दी जब Nathpa Jhakri Hydro Power Station द्वारा मानसून पूर्व व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी संभावित आपदाओं के दौरान जमीनी स्तर पर प्रतिक्रिया की वास्तविक स्थिति को समझना था।
नाथपा बांध से लेकर झाकड़ी और दत्तनगर तक फैले इस अभ्यास में कई संवेदनशील बिंदुओं को चिन्हित कर वहां सायरन बजाए गए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, नाथपा, भाबानगर, नुगलसरी, जेओरी, ब्रो और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ चेतावनी संकेत सक्रिय किए गए, जिससे आपातकालीन स्थिति का वास्तविक परिदृश्य तैयार किया जा सके।
इस दौरान District Disaster Management Authority (किन्नौर, शिमला, कुल्लू) की टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर मोर्चा संभाला। National Disaster Response Force की विशेष इकाइयों ने रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया, जबकि हिमाचल प्रदेश पुलिस और Central Industrial Security Force ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाई।
ड्रिल के दौरान यह भी देखा गया कि सूचना कितनी तेजी से एक एजेंसी से दूसरी तक पहुंचती है और कितनी जल्दी राहत कार्य शुरू किया जा सकता है। कई स्थानों पर मॉक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
परियोजना प्रमुख Rajeev Kapoor ने बताया कि इस तरह की कवायद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक तैयारी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सतलुज घाटी में हर साल मानसून के दौरान जोखिम बना रहता है, इसलिए समय रहते समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करना बेहद जरूरी है।
स्थानीय निवासियों ने भी इस अभ्यास में सहयोग दिया और प्रशासन द्वारा दी गई पूर्व सूचना के चलते किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट की स्थिति नहीं बनी। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की जागरूकता भविष्य में आपदा के समय जनहानि को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


