
कुरुक्षेत्र में हीरक जयंती समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने कहा- पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत भागीदारी और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने महिलाओं की स्थिति में बदलाव की मजबूत नींव रखी
हरियाणा की छह दशक की विकास यात्रा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बेटियों की उपलब्धियां अब प्रदेश की बदलती सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को कुरुक्षेत्र में राज्य के गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हीरक जयंती समारोह में महिला सशक्तीकरण, बालिका शिक्षा और खेलों में बेटियों की सफलता को हरियाणा की उल्लेखनीय उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश की पहचान लंबे समय तक लैंगिक असंतुलन जैसी सामाजिक चुनौतियों से जुड़ी रही, वहां महिलाओं के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बताया कि हरियाणा में जन्म के समय प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या वर्ष 2014 में 871 थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर लगभग 915 हो गई। उन्होंने इसे सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों का महत्वपूर्ण संकेत बताया। साथ ही उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से यह अनुपात समानता के स्तर तक पहुंचेगा और महिलाओं के स्वास्थ्य तथा बालिका शिक्षा में सुधार की गति और तेज होगी।
समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने राज्य की हीरक जयंती का लोगो भी जारी किया।
पंचायतों में 50 प्रतिशत भागीदारी से महिलाओं को मिला नेतृत्व का अवसर
महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय शासन में महिलाओं की इतनी बड़ी भागीदारी उन्हें निर्णय लेने, विकास योजनाओं को दिशा देने और अपने समुदाय की समस्याओं को सीधे उठाने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने राशन डिपो के आवंटन में महिलाओं के लिए आरक्षण और ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए वेलफेयर बोर्ड के गठन जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति के अनुसार, महिला सशक्तीकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर भी शामिल हैं।
पानीपत से शुरू हुआ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान बना बदलाव की पहचान
राष्ट्रपति ने जनवरी 2015 में पानीपत से शुरू हुए राष्ट्रीय ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को हरियाणा के सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने और उनके जन्म, शिक्षा तथा अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
जन्म के समय लिंगानुपात में दर्ज सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक बदलाव आगे भी जारी रहना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से महिला स्वास्थ्य सेवाओं और बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान बनाए रखने की अपेक्षा जताई, ताकि सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ बेटियों को जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
सुचेता कृपलानी से कल्पना चावला तक, हरियाणा की बेटियों ने रचा इतिहास
हरियाणा की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने उन महिलाओं को याद किया जिन्होंने देश और समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती पर जन्मी सुचेता कृपलानी ने देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा। वहीं, नवगठित हरियाणा विधानसभा की पहली अध्यक्ष शन्नो देवी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अंतरिक्ष तक पहुंचकर देश की बेटियों के सपनों को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं और यह साबित करती हैं कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकती हैं।
खेलों में हरियाणा की बेटियों का दबदबा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया देश का गौरव
राष्ट्रपति मुर्मु ने खेलों में हरियाणा की महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि उचित प्रोत्साहन और अवसर मिलने से प्रदेश की बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया है।
उन्होंने निशानेबाज मनु भाकर, मुक्केबाज स्वीटी बूरा और जैस्मिन लम्बोरिया जैसी खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी सफलता ने हरियाणा की पहचान को वैश्विक खेल मंच पर मजबूत किया है।
कजाकिस्तान में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में हरियाणा की मनीषा भानवाला के स्वर्ण पदक को राष्ट्रपति ने ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने इस सफलता के लिए मनीषा को बधाई देते हुए प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली अन्य भारतीय महिला पहलवानों की भी सराहना की।
राष्ट्रपति ने इस वर्ष हुए राष्ट्रमंडल खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते गए सात स्वर्ण पदकों में से पांच बेटियों ने हासिल किए। रेवाड़ी की पैरा खिलाड़ी शर्मिला ढांडा की स्वर्णिम सफलता को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, शर्मिला की उपलब्धि बताती है कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के सामने शारीरिक चुनौतियां भी बाधा नहीं बन सकतीं।
राष्ट्रपति ने कहा- सामाजिक बदलाव की रफ्तार बनाए रखना जरूरी
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा में महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए किए जा रहे प्रयास सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वास्तविक सशक्तीकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समानता और आर्थिक अवसरों के क्षेत्र में निरंतर काम करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया एक साथ चलनी चाहिए। हरियाणा की बेटियों ने शिक्षा, राजनीति, विज्ञान, अंतरिक्ष और खेलों में अपनी क्षमता साबित की है। अब जरूरत इस बात की है कि उन्हें हर स्तर पर समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन मिलें।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि हरियाणा अपनी ऐतिहासिक विरासत और नई पीढ़ी की प्रतिभा के बल पर विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। हीरक जयंती के अवसर पर उनका संदेश स्पष्ट था कि प्रदेश की प्रगति का आकलन केवल आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास से नहीं, बल्कि महिलाओं और बेटियों को मिले सम्मान, अधिकारों तथा अवसरों से भी किया जाना चाहिए।
