हरियाणा ने प्राकृतिक खेती को बनाया विकास का नया आधार, ‘हरियाणा प्रकृति’ बनेगा किसानों की वैश्विक पहचान

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हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक खेती को राज्य की कृषि नीति के केंद्र में रखते हुए इसे किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया है। पंचकूला में आयोजित “प्राकृतिक खेती संवाद कार्यक्रम” के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश अब ‘हरित क्रांति 2.0’ के लक्ष्य के साथ कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक नई पद्धति नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण और प्रकृति के साथ संतुलित विकास की मजबूत आधारशिला बनकर उभर रही है। हरियाणा भी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और स्थायी विकास को प्राथमिकता दे रहा है।

सरकार ने बताया कि ‘विजन-2035’ के तहत प्रदेश में क्लस्टर आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कृषि समाधान, एग्री-स्टार्टअप्स और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा गया कि हरियाणा सरकार ‘हरियाणा प्रकृति’ नाम से एक विशेष ब्रांड विकसित करेगी। इस ब्रांड के माध्यम से प्राकृतिक तरीके से तैयार कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे हरियाणा के किसानों को बेहतर बाजार, उत्पादों का अधिक मूल्य और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

सरकार ने यह भी दोहराया कि कृषि क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी दिशा में प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि, आधुनिक अनुसंधान और मूल्य संवर्धन को एक साथ जोड़कर हरियाणा को देश के अग्रणी कृषि राज्यों में बनाए रखने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘हरियाणा प्रकृति’ ब्रांड को प्रभावी ढंग से विकसित किया गया और किसानों को आधुनिक तकनीक तथा बाजार से जोड़ा गया, तो इससे प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई गति मिलेगी और हरियाणा प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकेगा।

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